सोलन. कल लोकतंत्र पर्व है इस पर्व में हम सभी अपना कीमती वोट डाल कर अपना जनप्रतिनिधि चुनने जा रहे है. ताकि हमारे विधानसभा क्षेत्र का विकास हो सके. लेकिन सोलन विधानसभा क्षेत्र में कुछ ऐसे लोग भी है. जिन्हें चुनाव से ज़्यादा दो वक्त की रोटी की चिंता है.
यही वजह है कि उन्हें यह तक भी मालूम नहीं है कि उनके क्षेत्र में कौन कौन से दावेदार है. कौन सा दावेदार उनके क्षेत्र के लिए अच्छा और उचित साबित हो सकता है. यही वह लोग है जिनकी मजबूरी का राजनैतिक दल फायदा उठा जाते है और मजबूत लोकतंत्र नहीं बनता.
लोगों को यही जानकारी नहीं
ज्यादातर लोगों को यही जानकारी नहीं है कि उनके विधानसभा क्षेत्र से कितने लोग मैदान में है और कौन कौन है. कोई सांसद के नाम पर तो कोई कांग्रेस के नाम पर वोट डालने को तैयार है तो कोई वोट डालने में अपना फायदा ढूंड रहा है. मतदाताओं को यह जरूर पता है कि सुननी सबकी है. लेकिन करनी अपने मन की है लेकिन शायद उनके मन तक अभी तक कोई प्रत्याशी पहुंच नहीं पाया है.
गांव की बात छोड़ो शहर में भी ज्यादातर मतदाताओं को प्रत्याशियों का नाम तक पता नहीं है फिर न जाने प्रत्याशी चुनाव प्रसार में आखिर घर-घर जा कर वोट मांग किस से रहे है. ऐसे में प्रश्न यह भी उठता है कि मजबूत लोकतंत्र की नींव “आम मतदाता” की क्या कल होने वाले लोकतंत्र के पर्व में कोई महत्वता है भी या नहीं, या मात्र कुछ लोग मिल कर जिन्हें हम राजनीतिक दलों का कैडर वोट कहते है वही चुनाव में महत्व रखते है.
