नई दिल्ली. टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा फैसला हुआ है। Tata Sons के बोर्ड ने N. Chandrasekaran को एक और पांच साल के कार्यकाल के लिए Executive Chairman के पद पर फिर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को मुंबई में हुई बोर्ड बैठक में लिया गया। खास बात यह है कि चंद्रशेखरन ने पिछले महीने अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद संभालने की इच्छा नहीं जताई थी, लेकिन अब उन्होंने बोर्ड के अनुरोध पर अपना फैसला बदल दिया है।
पिछले महीने पद छोड़ने का किया था संकेत
N. Chandrasekaran अगस्त 2026 में बोर्ड को बता चुके थे कि वह अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को पेश नहीं करेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है।
इसके बाद Tata Sons में नेतृत्व के अगले विकल्पों को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। हालांकि, 3 सितंबर को कंपनी की Nomination and Remuneration Committee ने मामले पर विचार करते हुए चंद्रशेखरन से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने का अनुरोध किया। समिति ने उनके योगदान और टाटा समूह के व्यापक हितों का हवाला देते हुए उन्हें फिर से नियुक्त करने की सिफारिश की।
बोर्ड ने बहुमत से मंजूर किया फैसला
17 सितंबर की बैठक में चंद्रशेखरन ने बोर्ड के अनुरोध को स्वीकार कर लिया। इसके बाद बोर्ड ने बहुमत के आधार पर उन्हें मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद अगले पांच साल के लिए Executive Chairman नियुक्त करने का फैसला किया।
चंद्रशेखरन 2017 से Tata Sons का नेतृत्व कर रहे हैं। 2022 में उन्हें दूसरा पांच साल का कार्यकाल मिला था। अब नई नियुक्ति से उनका कार्यकाल आगे भी जारी रहेगा।
Noel Tata ने किया विरोध
इस फैसले पर Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने विरोध दर्ज कराया। रिपोर्टों के मुताबिक, वह बोर्ड में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के खिलाफ मतदान करने वाले एकमात्र निदेशक थे। चंद्रशेखरन के नेतृत्व और Tata Sons की रणनीतिक दिशा को लेकर बोर्ड और Tata Trusts के कुछ सदस्यों के बीच पहले से मतभेदों की खबरें आती रही हैं।
Tata Sons की लिस्टिंग भी बनी बड़ा मुद्दा
चंद्रशेखरन के कार्यकाल और Tata Sons की संभावित लिस्टिंग का मुद्दा पिछले कई महीनों से चर्चा में रहा है। Tata Sons के बोर्ड ने अब RBI की लागू लिस्टिंग गाइडलाइंस का पालन करने के लिए कदम शुरू करने का भी फैसला किया है। कंपनी ने कहा है कि इस मामले में वह RBI, Tata Trusts और अन्य संबंधित हितधारकों से मार्गदर्शन लेगी।
रिपोर्टों के अनुसार, Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर Noel Tata का रुख अलग रहा है। यही मुद्दा समूह के भीतर नेतृत्व और रणनीति से जुड़ी चर्चाओं में भी सामने आता रहा है।
उत्तराधिकारी को लेकर भी शुरू हुई थी चर्चा
जब चंद्रशेखरन ने अगस्त में तीसरा कार्यकाल लेने से इनकार किया था, तब Tata Sons में संभावित उत्तराधिकारी की तलाश को लेकर भी चर्चा शुरू हुई थी। कुछ रिपोर्टों में Tata Steel के CEO T. V. Narendran, Tata Sons के Group CFO Saurabh Agrawal और NSE के CEO Ashish Chauhan समेत कुछ अन्य नामों का उल्लेख किया गया था। हालांकि, चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बाद फिलहाल चेयरमैन पद के लिए अलग उत्तराधिकारी चुनने की जरूरत टल गई है।
टाटा समूह के लिए क्यों अहम है फैसला?
N. Chandrasekaran के नेतृत्व में टाटा समूह ने एयरलाइन, डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों में विस्तार किया है। दूसरी ओर, समूह की कुछ नई और बड़ी पहलों से जुड़ी वित्तीय चुनौतियां भी चर्चा में रही हैं। ऐसे समय में उनका पांच साल का नया कार्यकाल Tata Sons की आगे की रणनीति और नेतृत्व व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
17 सितंबर के फैसले के बाद अब टाटा समूह के सामने एक ओर चंद्रशेखरन का नया कार्यकाल जारी रखने का रास्ता साफ हुआ है, वहीं Tata Sons की लिस्टिंग और उससे जुड़े नियामकीय कदम भी आगे बढ़ेंगे। इन दोनों मुद्दों पर आने वाले समय में समूह की रणनीति पर नजर रहेगी।

