नई दिल्ली. Supreme Court of India ने कक्षा 8 की एनसीईआरटी किताब में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय को लेकर चल रहे विवाद में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस अध्याय के लेखकों को ब्लैकलिस्ट करते हुए कहा कि वे भविष्य में अगली पीढ़ी के लिए पाठ्यपुस्तक तैयार नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना पोस्ट करने वालों पर भी कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए आदेश के बाद भी कुछ सोशल मीडिया हैंडल ने गलत तरीके से सामग्री साझा की, जो गंभीर चिंता का विषय है।
केंद्र ने सभी कक्षाओं की किताबों की समीक्षा के निर्देश दिए
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि केंद्र ने National Council of Educational Research and Training (NCERT) को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम की जांच के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुझाव दिया कि यदि केंद्र सरकार खुद एक विशेषज्ञ समिति गठित करे तो अदालत इसकी सराहना करेगी।
NCERT ने मांगी बिना शर्त माफी
विवाद के बाद NCERT ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी है। परिषद ने कहा कि विवादित अध्याय वाली पूरी किताब वापस ले ली गई है और अब वह उपलब्ध नहीं है।
NCERT ने कहा कि शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए वह प्रतिबद्ध है।
विवादित किताब लौटाने और ऑनलाइन सामग्री हटाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद NCERT ने एक सलाह जारी कर कहा है कि जिनके पास भी ‘Exploring Society: India and Beyond’ नाम की कक्षा 8 की यह किताब है, वे उसे परिषद मुख्यालय में वापस कर दें।
साथ ही सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मौजूद ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ अध्याय से जुड़ी सामग्री को भी जल्द से जल्द हटाने को कहा गया है।
इस बीच Ministry of Education ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्रालय को पत्र लिखकर इस विवादित किताब की सामग्री को डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर प्रसारित होने से रोकने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा विवाद?
कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में कहा गया था कि भ्रष्टाचार, मामलों का भारी लंबित बोझ और जजों की कमी भारतीय न्याय व्यवस्था की बड़ी चुनौतियां हैं।
इसी सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई थी। बाद में NCERT ने इसे “अनुचित सामग्री” बताते हुए माफी मांगी और कहा कि किताब को संबंधित अधिकारियों से परामर्श के बाद दोबारा लिखा जाएगा।
