नई दिल्ली: NEET Paper Leak को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन तेज होने के बीच उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि उनका यह फैसला छात्रों के व्यापक हित और देश की एकता को ध्यान में रखकर लिया गया है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि मौजूदा स्थिति का फायदा राष्ट्रविरोधी तत्व उठाएं या छात्र कानूनी उलझनों में फंसकर अपने भविष्य से समझौता करें।
‘छात्र शक्ति जिंदाबाद’: प्रधान के इस्तीफ़े पर CJP की प्रतिक्रिया
इस्तीफे के बाद Cockroach Janta Party (CJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे छात्र आंदोलन की जीत बताया और “Long Live Student Power” का नारा दिया। वहीं पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत डिपके ने कहा कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने मांग की कि कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो।
छात्रों के हित में लिया गया फैसला : धर्मेंद्र प्रधान
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले चार दशकों से वे शिक्षा, छात्रों और शिक्षकों से जुड़े रहे हैं तथा हमेशा मजबूत और समावेशी Education System के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने कहा कि NEET UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। मामले की जांच CBI को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और NEET Re Exam कराने का फैसला लिया गया। साथ ही अगले वर्ष से परीक्षा Computer-Based Test (CBT) Mode में आयोजित करने की घोषणा की गई ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता दो करोड़ नहीं बल्कि 20 लाख से अधिक छात्रों के हितों की रक्षा करना और पुनर्परीक्षा को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना था। उन्होंने यह भी बताया कि 16 जुलाई को घोषित NEET UG Result में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों सहित कई मेधावी छात्रों ने सफलता हासिल की, जो इस प्रक्रिया की सफलता को दर्शाता है।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से दुखी किया है, लेकिन यह उनके लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि देश का युवा भ्रम और विवाद में उलझे, इसलिए उन्होंने बड़े हित को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।

