नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर को निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से जुड़े मामले में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की भूमिका पर नाराजगी जताई। अदालत ने आयोग के जवाब को असंतोषजनक बताते हुए अगली सुनवाई में NCPCR के चेयरपर्सन और डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। मामला Right to Education Act, 2009 की धारा 12(1)(c) के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ा है। इस प्रावधान के तहत निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में अपनी कुल छात्र क्षमता की 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करने और उन्हें मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान है।
NCPCR की भूमिका पर सुप्रीम कोर्ट सख्त
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान NCPCR की ओर से दाखिल हलफनामे पर गौर किया और उसे संतोषजनक नहीं माना। अदालत ने कहा कि RTE Act के तहत 25 प्रतिशत सीटों के प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू कराने में NCPCR की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
पीठ ने NCPCR की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि आयोग एक वैधानिक संस्था है और उसे यह समझना होगा कि RTE Act के उद्देश्यों को जमीन पर लागू कराने की उससे बड़ी अपेक्षा है।
‘Neighbourhood Schools’ की अवधारणा को लागू करना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि RTE Act में ‘Neighbourhood Schools’ की अवधारणा का उद्देश्य बच्चों के बीच वर्ग, जाति और लिंग जैसी सामाजिक बाधाओं को कम करना है। अदालत के अनुसार, कानून में जिस उद्देश्य की कल्पना की गई है, उसे सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि स्कूलों में उसका वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा।
पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि NCPCR को यह देखना होगा कि आसपास के निजी स्कूलों में RTE Act की धारा 12 के तहत निर्धारित प्रावधानों का प्रभावी पालन हो रहा है या नहीं।
अगली सुनवाई में NCPCR के शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी
अदालत ने कहा कि अगली सुनवाई के दौरान NCPCR के चेयरपर्सन और डायरेक्टर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहना होगा। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि इस स्तर पर मामला अवमानना का नहीं है, बल्कि आयोग को RTE Act की धारा 12 के उद्देश्य और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने की जरूरत है।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने 25 प्रतिशत सीटों को EWS छात्रों के लिए सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई निर्देश जारी किए थे। उसी दौरान NCPCR को मामले में पक्षकार बनाकर RTE Act के क्रियान्वयन की निगरानी में भूमिका दी गई थी। आयोग के पास इस संबंध में Standard Operating Procedure (SoP) भी मौजूद है।
