नई दिल्ली: भारत में Renewable Energy को बढ़ावा देने और Solar Power की क्षमता बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को Pradhan Mantri Surya Sarovar Yojana (PM-SSY) को मंजूरी दे दी। इस योजना के लिए सरकार ने कुल ₹5,070 करोड़ का प्रावधान किया है। योजना का मुख्य उद्देश्य देश में Floating Solar Projects को बढ़ावा देना है, जिसके तहत जलाशयों और अन्य जल निकायों की सतह पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
2030-31 तक 5,000 MW Floating Solar Capacity का लक्ष्य
सरकार की इस योजना के तहत वर्ष 2030-31 तक 5,000 MW Floating Solar Capacity विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए परियोजनाओं को Central Financial Assistance (CFA) दी जाएगी। केंद्र सरकार Floating Solar Projects के लिए अधिकतम ₹1 करोड़ प्रति MW तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।
इस योजना को Solar Energy Corporation of India (SECI) की ओर से लागू किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब देश में Floating Solar की मौजूदा स्थापित क्षमता करीब 0.7 GW है, जबकि भारत में इसकी तकनीकी क्षमता लगभग 102 GW आंकी गई है।
Solar Projects के साथ Battery Storage भी जरूरी
PM Surya Sarovar Yojana के तहत सहायता पाने वाली परियोजनाओं में Battery Energy Storage System को भी शामिल करना जरूरी होगा। परियोजनाओं में कम से कम दो घंटे के बराबर Battery Storage की व्यवस्था करनी होगी। पूरी योजना के स्तर पर यह करीब 10,000 MWh की Storage Capacity के बराबर होगी।
सरकार का मानना है कि Solar Power Generation के साथ Energy Storage को जोड़ने से Renewable Energy को जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी और बिजली आपूर्ति को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
जमीन की समस्या का समाधान बन सकती है Floating Solar
देश में Solar Power Projects का बड़ा हिस्सा फिलहाल जमीन पर लगाए जाने वाले Ground-mounted Solar Projects पर निर्भर है। इसके लिए बड़े और लगातार जुड़े हुए भूखंडों की जरूरत होती है। जमीन की उपलब्धता और बढ़ती लागत के साथ-साथ Rehabilitation और Resettlement जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
ऐसे में जलाशयों पर Solar Panels लगाने से जमीन की आवश्यकता काफी हद तक कम की जा सकती है। सरकार का मानना है कि Floating Solar देश में Solar Energy Projects को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।
अभी राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर Solar Projects लगाए गए हैं, जहां पर्याप्त जमीन और अच्छी Solar Radiation उपलब्ध है। Reservoir-based Solar Projects के विस्तार से उन राज्यों में भी Renewable Energy Capacity बढ़ाने का रास्ता खुलेगा, जहां बड़े जल निकाय तो हैं लेकिन जमीन की उपलब्धता सीमित है।
भारत में Floating Solar की क्षमता कितनी है?
National Institute of Solar Energy (NISE) के आकलन के मुताबिक भारत में करीब 102.18 GW Floating Solar Potential मौजूद है। इस आकलन में पानी की उपलब्धता, जलाशयों की गहराई, Solar Irradiation, सड़कों और Substations की निकटता जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा गया है।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा और तेलंगाना को Floating Solar Potential वाले प्रमुख राज्यों में शामिल किया गया है। इन राज्यों में बड़े जलाशयों और अन्य जल निकायों का इस्तेमाल Solar Power Generation के लिए किया जा सकता है।
Floating Solar के क्या होंगे फायदे?
Floating Solar Projects का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनके लिए कृषि या अन्य उपयोगी जमीन की जरूरत नहीं होती। इससे Land Acquisition की चुनौती कम हो सकती है। इसके अलावा जलाशयों की सतह पर Solar Panels लगाए जाने से पानी के वाष्पीकरण को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
पानी के ऊपर का अपेक्षाकृत ठंडा वातावरण Solar Panels के संचालन के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। इससे Panels की Efficiency बेहतर हो सकती है और जमीन पर लगे Solar Panels की तुलना में कुछ Operational Benefits मिल सकते हैं।
Omkareshwar में देश का सबसे बड़ा Floating Solar Project
भारत में Floating Solar के क्षेत्र में Omkareshwar Floating Solar Park पहले से एक प्रमुख परियोजना है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी पर स्थित इस परियोजना की क्षमता 278 MW है और इसे आगे बढ़ाकर 600 MW तक करने की योजना है।
हालांकि, इस परियोजना में फिलहाल On-site Battery Storage नहीं है। नई PM Surya Sarovar Scheme में Battery Storage को अनिवार्य किए जाने से आने वाले Floating Solar Projects में Solar Generation के साथ Storage को भी महत्व मिलेगा।
Floating Solar Projects की लागत ज्यादा
Floating Solar Technology के कई फायदे हैं, लेकिन इसकी लागत Ground-mounted Solar Projects की तुलना में अधिक है। सरकारी अनुमान के अनुसार Floating Solar System की लागत करीब ₹4.9 करोड़ से ₹5.2 करोड़ प्रति MW हो सकती है।
Floating Platforms, Anchoring और Mooring Systems जैसी अतिरिक्त तकनीकी जरूरतों के कारण इसकी लागत जमीन पर लगाए जाने वाले Solar Projects से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा हो सकती है। इसके अलावा Mandatory Battery Storage से भी परियोजनाओं की कुल लागत बढ़ेगी।
कुछ मौजूदा परियोजनाओं में Floating Structures के खराब होने और Cables से जुड़ी समस्याओं जैसी Engineering Challenges भी सामने आई हैं। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि Floating Solar देश में Renewable Energy के विस्तार के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
रोजगार और Domestic Manufacturing को भी बढ़ावा
सरकार के मुताबिक PM Surya Sarovar Yojana से देश में Specialized Solar Components के Domestic Manufacturing को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही योजना से करीब 16,000 से 17,000 रोजगार पैदा होने का अनुमान है।
केंद्र सरकार का उद्देश्य Floating Solar को केवल एक वैकल्पिक Solar Technology के तौर पर विकसित करना नहीं है, बल्कि इसके जरिए Renewable Energy Capacity को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों तक फैलाना भी है। इससे जमीन पर निर्भरता घटेगी, Solar Power Generation बढ़ेगा और Battery Storage के साथ Renewable Electricity को अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने का रास्ता तैयार होगा।
भारत के Green Energy Target के लिए अहम कदम
भारत ने वर्ष 2030 तक 500 GW Non-Fossil Fuel Electricity Capacity हासिल करने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में Solar Energy की नई संभावनाओं को तलाशना बेहद महत्वपूर्ण है। PM Surya Sarovar Yojana इसी दिशा में सरकार की एक अहम पहल मानी जा रही है।
जलाशयों और अन्य Water Bodies का इस्तेमाल कर Solar Power Generation बढ़ाने की यह योजना भारत के Renewable Energy Landscape में बड़ा बदलाव ला सकती है। सरकार को उम्मीद है कि ₹5,070 करोड़ के निवेश और Central Financial Assistance से Floating Solar Sector को गति मिलेगी और देश की Energy Security के साथ-साथ Clean Energy Transition को भी मजबूती मिलेगी।

