नई दिल्ली. बिहार की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह जानकारी विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने दी।
नीतीश कुमार का इस्तीफा जेडीयू एमएलसी संजय गांधी द्वारा विधान परिषद में सौंपा गया। अब उनके 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद जरूरी था इस्तीफा
नीतीश कुमार ने 16 मार्च को हुए चुनाव में राज्यसभा सीट हासिल की थी। नियमों के मुताबिक, संसद के किसी सदन के लिए चुने जाने के बाद उन्हें 14 दिनों के भीतर राज्य विधानमंडल की सदस्यता छोड़नी थी।
इसी प्रक्रिया के तहत उन्होंने 30 मार्च को अपनी विधान परिषद सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 27 मार्च को बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने भी कहा था कि मुख्यमंत्री के पास इस्तीफा देने के लिए 30 मार्च तक का समय है।
क्या मुख्यमंत्री पद भी छोड़ेंगे नीतीश कुमार?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वह मुख्यमंत्री पद भी छोड़ेंगे या कुछ समय तक इस पद पर बने रहेंगे।
संविधान के प्रावधानों के अनुसार, कोई व्यक्ति यदि मुख्यमंत्री है और राज्य विधानमंडल का सदस्य नहीं रहता, तो वह अधिकतम छह महीने तक पद पर बना रह सकता है।
इसी संदर्भ में 20 मार्च को बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा था कि:
“नीतीश कुमार नियमानुसार राज्य विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के तहत वह अगले छह महीने तक बिहार के मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं।”
यानी फिलहाल यह साफ नहीं है कि वह तुरंत मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे या कुछ समय तक सरकार की कमान संभालते रहेंगे।
उत्तराधिकारी को लेकर सस्पेंस बरकरार
नीतीश कुमार के इस्तीफे से पहले ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई थी।
रविवार देर शाम उनके पटना स्थित सरकारी आवास पर जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं की कई बंद कमरे में बैठकें हुईं। इन बैठकों के पीछे दो बड़ी वजहें बताई जा रही हैं: पार्टी के एक वर्ग की यह मांग कि नीतीश कुमार बिहार में ही बने रहें
और दूसरी, उनके संभावित उत्तराधिकारी को लेकर असमंजस अब सबकी नजर इस बात पर है कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ते हैं, तो बिहार की सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी।
20 साल के शासन के अंत के संकेत
नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया था। उस समय उनके साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इस अटकल को और मजबूत कर दिया था कि बिहार में उनके करीब 20 साल लंबे शासन का अंत अब नजदीक है।
नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार की राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा रहे हैं और उन्हें राज्य का सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाला मुख्यमंत्री माना जाता है।
उनका राज्यसभा जाना केवल एक संसदीय बदलाव नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता संरचना में बड़े राजनीतिक संक्रमण का संकेत भी माना जा रहा है।
अब आगे क्या?
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद अब अगले कुछ दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। आगे तीन बड़े सवाल हैं:
- क्या नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे?
संवैधानिक तौर पर वह कुछ समय तक बने रह सकते हैं।
- जेडीयू किसे आगे करेगी?
यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो पार्टी को नया चेहरा सामने लाना होगा।
- NDA की बिहार रणनीति क्या होगी?
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना और बिहार की सत्ता में संभावित बदलाव, दोनों ही NDA की 2026-27 की राजनीतिक रणनीति से जुड़े माने जा रहे हैं।
बिहार की राजनीति में नया अध्याय
नीतीश कुमार का विधान परिषद से इस्तीफा केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वह दिल्ली की राजनीति में नई भूमिका निभाते हैं या बिहार में पर्दे के पीछे से नेतृत्व जारी रखते हैं।
