नई दिल्ली. झारखंड ने ऊर्जा क्षेत्र (Energy Sector) में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को Power Surplus State के रूप में स्थापित कर लिया है। बुधवार और गुरुवार की मध्यरात्रि से Patratu Vidyut Utpadan Nigam Limited (PVUNL) की दूसरी 800 MW Unit का व्यावसायिक संचालन (Commercial Operation) शुरू हो गया। इसके साथ ही राज्य ने बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है और अब अपनी जरूरत से अधिक बिजली उपलब्ध करा रहा है।
ऊर्जा विभाग के अनुसार, नई यूनिट शुरू होने के बाद झारखंड की बिजली उपलब्धता राज्य की मौजूदा मांग से काफी अधिक हो गई है। इससे न केवल बिजली संकट समाप्त होगा बल्कि भविष्य में अतिरिक्त बिजली बेचकर सरकार राजस्व भी अर्जित कर सकेगी।
Patratu Project से राज्य को मिली नई ताकत
Patratu Thermal Power Project की दूसरी 800 मेगावाट यूनिट से उत्पादित बिजली का लगभग 85 प्रतिशत यानी करीब 680 MW सीधे झारखंड को मिलेगा। इससे पहले नवंबर 2025 में शुरू हुई पहली 800 MW यूनिट भी राज्य को लगभग 680 MW बिजली उपलब्ध करा रही है।
दोनों यूनिट पूरी तरह चालू होने के बाद अकेले Patratu Project से झारखंड के बिजली ग्रिड में 1,360 MW बिजली जुड़ गई है। इससे राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
अब जरूरत से करीब 600 MW अधिक बिजली
राज्य ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में औसतन प्रतिदिन लगभग 3,000 MW बिजली की आवश्यकता होती है। दूसरी ओर Patratu Project और अन्य स्रोतों को मिलाकर राज्य की कुल बिजली उपलब्धता बढ़कर लगभग 3,885 MW हो गई है।
यानी वितरण के दौरान होने वाले नुकसान (Distribution Loss) को छोड़ दें तो राज्य के पास प्रतिदिन लगभग 600 MW अतिरिक्त बिजली उपलब्ध है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह अतिरिक्त बिजली गैर-पीक समय (Non-Peak Hours) में दूसरे राज्यों को बेचकर सरकार अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकती है।
NTPC और JBVNL का संयुक्त उपक्रम
Patratu Vidyut Utpadan Nigam Limited (PVUNL) NTPC और Jharkhand Bijli Vitran Nigam Limited (JBVNL) का संयुक्त उपक्रम (Joint Venture) है। इस परियोजना में NTPC की 74 प्रतिशत और JBVNL की 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
परियोजना का अंतिम लक्ष्य कुल 4,000 MW बिजली उत्पादन क्षमता विकसित करना है। फिलहाल पहले चरण में तीन यूनिटों के जरिए 2,400 MW उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। दो यूनिट शुरू हो चुकी हैं और तीसरी 800 MW यूनिट भी आने वाले महीनों में शुरू होने की उम्मीद है।
आधुनिक तकनीक से लैस है प्लांट
Patratu Thermal Power Plant में Supercritical Technology का इस्तेमाल किया गया है, जिससे बिजली उत्पादन अधिक दक्षता के साथ किया जा सके। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए परियोजना में कई आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया है।
प्लांट में Air-Cooled Condensers लगाए गए हैं, जिससे पानी की खपत कम होती है। वहीं 100% Dry Ash Handling System अपनाया गया है, जिससे राख के निस्तारण को अधिक सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।
इस परियोजना के लिए कोयले की आपूर्ति लातेहार जिले के Banahardi Coal Block से की जाती है, जबकि संचालन के लिए आवश्यक पानी पास स्थित Patratu Dam से लिया जाता है।
उद्योगों और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने से झारखंड में उद्योगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी। इससे राज्य की बाहरी बिजली पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाएगी और महंगी बिजली खरीदने की जरूरत भी कम होगी।
स्थिर बिजली आपूर्ति से नए औद्योगिक निवेश (Industrial Investment) को बढ़ावा मिलेगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही राज्य के सभी जिलों में बिजली व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र में नई पहचान
Patratu PVUNL की दूसरी यूनिट के शुरू होने के साथ झारखंड ने ऊर्जा क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। अब राज्य केवल अपनी जरूरतें पूरी करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली उपलब्ध होने पर दूसरे राज्यों को भी आपूर्ति कर सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में झारखंड की आर्थिक और औद्योगिक प्रगति को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
