नई दिल्ली. दक्षिण अफ्रीका की मानवाधिकार वकील और भारतीय मूल की नवनेथेम ‘नवी’ पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई है। उन्हें यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए दिया गया है। Norwegian Nobel Committee के अनुसार, पिल्लै ने हिंसा और संघर्ष से प्रभावित लोगों को न्याय दिलाने तथा देशों और उनके नेताओं को कानून के प्रति जवाबदेह बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए योगदान को मिला सम्मान
नवी पिल्लै को नोबेल शांति पुरस्कार देने के पीछे उनके लंबे मानवाधिकार कार्य और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में योगदान को प्रमुख कारण बताया गया है। Norwegian Nobel Committee ने कहा कि पिल्लै ने अपने करियर में कानून के शासन (Rule of Law) और सार्वभौमिक कानूनी सिद्धांतों के महत्व पर लगातार जोर दिया है। उन्होंने हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों को न्याय की उम्मीद दिलाने के साथ-साथ शक्तिशाली लोगों को भी जवाबदेह ठहराने का काम किया है।
समिति के मुताबिक, पिल्लै का मानवाधिकारों के प्रति समर्पण उनके शुरुआती करियर से ही दिखाई देता है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) के खिलाफ संघर्ष करने वाले लोगों का बचाव किया और बाद में अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके काम को शांति, न्याय और मानवाधिकारों के संरक्षण से जोड़कर देखा गया है।
कौन हैं नवी पिल्लै?
नवनेथेम ‘नवी’ पिल्लै का जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय मूल के एक परिवार में हुआ था। उनका बचपन दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के दौर में बीता। उस समय नस्लीय भेदभाव के कारण अश्वेत और अन्य गैर-श्वेत समुदायों को कई तरह की सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी असमानताओं का सामना करना पड़ता था।
इन परिस्थितियों के बावजूद पिल्लै ने कानून की पढ़ाई की और 1965 में कानून की डिग्री हासिल की। वह दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने वाली भारतीय मूल की पहली महिलाओं में शामिल हुईं। अपने पेशेवर जीवन में उन्होंने भेदभावपूर्ण कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई और रंगभेद विरोधी अभियानों से जुड़कर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए काम किया।
अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था में निभाईं अहम भूमिकाएं
नवी पिल्लै ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय न्यायिक पदों पर काम किया है। वह International Criminal Tribunal for Rwanda में न्यायाधीश रह चुकी हैं। इस न्यायाधिकरण ने रवांडा में हुए नरसंहार और उससे जुड़े गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के मामलों की सुनवाई में भूमिका निभाई थी। पिल्लै International Court of Justice में भी विशेष न्यायाधीश (Ad hoc Judge) के रूप में कार्य कर रही हैं। वह गाम्बिया बनाम म्यांमार (The Gambia v. Myanmar) मामले से जुड़ी हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानून और नरसंहार से संबंधित आरोपों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा, वह संयुक्त राष्ट्र के Occupied Palestinian Territory से संबंधित Independent International Commission of Inquiry की अध्यक्ष भी हैं। इन जिम्मेदारियों के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों के उल्लंघन और जवाबदेही से जुड़े मामलों में योगदान दिया है।
भारतीय मूल के नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सूची में शामिल
नवी पिल्लै को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के साथ ही वह भारतीय मूल के उन लोगों की सूची में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में नोबेल पुरस्कार हासिल किया है। भारतीय मूल के कई पुरस्कार विजेताओं ने विज्ञान, साहित्य, अर्थशास्त्र और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। इनमें हर गोबिंद खुराना को 1968 में चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार, वी. एस. नायपॉल को 2001 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार, वेंकटरमण ‘वेंकी’ रामकृष्णन को 2009 में रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार और अभिजीत बनर्जी को 2019 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार मिला था। सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर को 1983 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
अब तक किन भारतीय नागरिकों को मिला नोबेल पुरस्कार?
भारत के नागरिक के रूप में नोबेल पुरस्कार हासिल करने वालों में रवींद्रनाथ टैगोर, सी. वी. रमन, मदर टेरेसा, अमर्त्य सेन और कैलाश सत्यार्थी के नाम प्रमुख हैं। रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला था, जबकि सी. वी. रमन को 1930 में भौतिकी के क्षेत्र में यह सम्मान दिया गया। मदर टेरेसा को 1979 में शांति का नोबेल पुरस्कार, अमर्त्य सेन को 1998 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार और कैलाश सत्यार्थी को 2014 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला था। नवी पिल्लै की उपलब्धि मानवाधिकारों, अंतरराष्ट्रीय कानून और न्याय के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को वैश्विक मान्यता मिलने के रूप में देखी जा रही है।

