नई दिल्ली: वर्ष 2026 का रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार हेनरी बी कगन और केन्सो सोई को दिया गया है। रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने बुधवार को “असममित कार्बनिक संश्लेषण में गैर-रेखीय प्रभाव और ऑटोकैटलिसिस” की दो महत्वपूर्ण खोजों के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया। उनका शोध केंद्र रसायन विज्ञान की एक दिलचस्प विशेषता चिरैलिटी, यानी रासायनिक “हैंडेडनेस” है।
इस साल Nobel Prize की पुरस्कार राशि 12 million Swedish kronor, यानी करीब 1.2 million डॉलर है। यह राशि पुरस्कार पाने वाले व्यक्ति, छोटे समूह या संगठन के लिए समान निर्धारित की गई है। Nobel Committee के मुताबिक Kagan और Soai के शोध ने रसायन विज्ञान की एक ऐसी गुत्थी को समझने में मदद की है, जो एक सदी से भी अधिक समय से वैज्ञानिकों के सामने चुनौती बनी हुई थी।
कैसे सुलझी 100 साल पुरानी Chemical Mystery?
Nobel Committee for Chemistry के चेयरमैन Heiner Linke ने कहा कि Henri Kagan और Kenso Soai ने यह समझने में महत्वपूर्ण योगदान दिया कि Homochirality अपने आप कैसे विकसित हो सकती है। उनके द्वारा विकसित Chemical Reactions को Chemistry के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Chirality को आसान भाषा में समझें तो कई Chemical Molecules एक-दूसरे की Mirror Image हो सकती हैं। देखने में ये दोनों संरचनाएं काफी समान लगती हैं, लेकिन उनके गुण अलग हो सकते हैं। इसे ही Chemical “Handedness” कहा जाता है। मानव शरीर और प्रकृति में मौजूद कई महत्वपूर्ण Molecules में एक विशेष प्रकार की Chirality पाई जाती है।
Henri Kagan ने 1986 में रखी थी नींव
Henri B Kagan ने वर्ष 1986 में इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाया। उन्होंने Chemical Reactions को नियंत्रित करने का एक नया तरीका खोजा, जिसकी मदद से किसी Molecule की एक Mirror Image को दूसरी की तुलना में कहीं अधिक मात्रा में बनाया जा सकता था। इससे Chemists के लिए ऐसे Chemical Reactions विकसित करने की नई संभावनाएं खुलीं, जिनमें एक खास प्रकार की Molecular Structure को प्राथमिकता दी जा सके।
Kagan की इस खोज का प्रभाव Pharmaceutical Industry समेत कई क्षेत्रों पर पड़ा। उनकी खोज से Medicines, Flavours, Scents और New Materials बनाने के लिए जरूरी Chemical Reactions को बेहतर तरीके से विकसित करने में मदद मिली।
Kenso Soai ने 1995 में बढ़ाया कदम
इसके बाद Kenso Soai ने इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। वर्ष 1995 में प्रकाशित एक महत्वपूर्ण Research Paper में उन्होंने ऐसी Chemical Reaction का डिजाइन प्रस्तुत किया, जिसमें Homochirality हासिल करने की क्षमता थी। इसके बाद 2003 में उन्होंने ऐसी Reaction को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया, जिसमें दो संभावित Mirror Images में से केवल एक का निर्माण हुआ।
इसे Chemistry के इतिहास में एक असाधारण उपलब्धि माना गया, क्योंकि जीवन में प्राकृतिक रूप से होने वाली प्रक्रियाओं के अलावा इससे पहले किसी ने इस तरह की उपलब्धि हासिल नहीं की थी। इस प्रयोग को आज Soai Reaction के नाम से जाना जाता है और इसे Chemistry के सबसे चर्चित Chemical Experiments में गिना जाता है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह Nobel Prize?
2026 का Nobel Prize in Chemistry उन खोजों को मान्यता देता है, जिन्होंने Chemists को ऐसी Chemical Reactions विकसित करने में सक्षम बनाया, जिनसे Homochirality हासिल की जा सकती है। इसका महत्व सिर्फ Laboratory Experiments तक सीमित नहीं है। ऐसी Chemistry का इस्तेमाल Pharmaceutical Drugs, Flavours, Fragrances और Advanced Materials के विकास में किया जा सकता है।
गौरतलब है कि पिछले साल Chemistry का Nobel Prize तीन वैज्ञानिकों को ऐसे नए Molecular Structures विकसित करने के लिए दिया गया था, जो बड़ी मात्रा में Gas को अपने अंदर फंसा सकते हैं। इन खोजों से Greenhouse Gases को वातावरण से हटाने और रेगिस्तानी क्षेत्रों में Moisture Harvesting जैसी संभावनाओं का रास्ता खुला था।

