नई दिल्ली: लोकसभा ने Supreme Court (Number of Judges) Amendment Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस Bill का उद्देश्य Supreme Court में Chief Justice of India (CJI) को छोड़कर Judges की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करना है। सरकार का कहना है कि Supreme Court में लगातार बढ़ रहे pending cases और मुकदमों के बढ़ते बोझ को देखते हुए judicial capacity बढ़ाना जरूरी है।
Bill के पारित होने के साथ ही देश की सर्वोच्च अदालत में मामलों की सुनवाई और disposal को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। इससे Court के बढ़ते workload को manage करने और नागरिकों को timely justice उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Supreme Court में 33 से बढ़कर 37 होगी Judges की संख्या
वर्तमान व्यवस्था के तहत Chief Justice of India के अलावा Supreme Court में 33 Judges का प्रावधान है। नए Bill के लागू होने के बाद यह संख्या बढ़कर 37 Judges हो जाएगी।
इससे पहले मई 2026 में President Droupadi Murmu ने एक ordinance जारी कर Supreme Court में Judges की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का रास्ता साफ किया था। अब इस व्यवस्था को legislative backing देने के लिए Amendment Bill लोकसभा में लाया गया है।
Bill को Union Law and Justice Minister Arjun Ram Meghwal ने लोकसभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि यह judicial reforms की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
Pending Cases का बढ़ता बोझ बना बड़ी वजह
सरकार के अनुसार Supreme Court में लगातार litigation बढ़ रहा है। Court में नए मामलों की filing और मामलों के final disposal के बीच अंतर बना हुआ है, जिसके चलते pending cases का backlog बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 तक Supreme Court में 92 हजार से ज्यादा मामले pending थे। वर्ष 2025 में Court में करीब 75,410 fresh matters दाखिल हुए, जबकि 65 हजार से अधिक मामलों का disposal किया गया।
इससे साफ है कि नए मामलों की संख्या और disposed cases के बीच gap बना हुआ है। पुराने मामलों के साथ-साथ बड़े Benches के सामने सुनवाई की जरूरत वाले मामलों के कारण भी Court पर workload बढ़ रहा है।
2019 से लगभग पूरी sanctioned capacity पर काम कर रहा Supreme Court
रिपोर्ट के अनुसार Supreme Court वर्ष 2019 से करीब-करीब अपनी sanctioned strength of 34 Judges पर काम कर रहा है। इसके बावजूद fresh cases की बढ़ती संख्या और पुराने मामलों के pending रहने से docket management चुनौती बना हुआ है।
ऐसे में Judges की संख्या बढ़ाने को pending cases के backlog से निपटने के लिए एक practical और जरूरी कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि अतिरिक्त Judges मिलने से मामलों की hearing और disposal की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
Arjun Ram Meghwal ने बताया judicial reforms का हिस्सा
Bill को सदन में पेश करते हुए Law Minister Arjun Ram Meghwal ने कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व में “Reform, Perform and Transform” के मंत्र के तहत लगातार reforms किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि Supreme Court में Judges की संख्या बढ़ाने का निर्णय इसी judicial reform process का हिस्सा है। बढ़ती litigation को देखते हुए Court की judicial capacity को मजबूत करना जरूरी है, ताकि मामलों का प्रभावी और जल्द disposal हो सके।
Minister के अनुसार यह कदम citizens को timely justice उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण milestone साबित हो सकता है।
Lok Sabha में Opposition का हंगामा
इस बीच लोकसभा की कार्यवाही के दौरान Opposition members ने छात्रों के NEET protest के दौरान कथित police action का मुद्दा उठाते हुए हंगामा किया। विपक्षी सांसद Union Home Minister Amit Shah से इस मामले पर जवाब देने की मांग कर रहे थे।
Presiding officer Krishna Prasad Tenneti ने सदस्यों से अपनी सीटों पर वापस जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन के भीतर placards और banners लाना उचित नहीं है और सभी Members को parliamentary decorum का सम्मान करना चाहिए। हंगामा जारी रहने के कारण सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और बाद में 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा में भारतीय सांख्यिकी संस्थान बिल भी पेश किया गया।
दोपहर 12 बजे के बाद सदन की कार्रवाई शुरू होने पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान बिल, 2026 पेश किया।
इस बिल का उद्देश्य भारतीय सांख्यिकी संस्थान के लिए एक व्यापक वैधानिक ढांचा तैयार करना है, ताकि इसे सांख्यिकी विज्ञान और संबद्ध क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026 पेश किया। यह बिल बैंकर्स बुक्स से जुड़े सबूतों के कानून को समकालीन डिजिटल बैंकिंग प्रथाओं के अनुरूप बनाने से संबंधित है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना
लोकसभा की कार्रवाई शुरू होने पर स्पीकर ओम बिरला ने ग्लासगो में आयोजित 23वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलीटों के शानदार प्रदर्शन की सराहना की।
उन्होंने बताया कि भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इस प्रदर्शन के साथ भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा।
स्पीकर ने विशेष रूप से भारतीय महिला एथलीटों की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महिला खिलाड़ियों ने 8 गोल्ड सहित कुल 16 मेडल जीते।
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा अहमदाबाद
ओम बिरला ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स का अगला संस्करण वर्ष 2030 में अहमदाबाद, गुजरात में आयोजित होगा।
उन्होंने कहा कि ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की समापन समारोह के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स बैटन आधिकारिक रूप से भारत को सौंपा गया है। यह भारत के लिए आगामी खेलों की मेजबानी की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।
प्रश्नकाल भी नहीं हो सका सामान्य
कॉमनवेल्थ गेम्स पर बधाई संदेश के बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने छात्रों के विरोध से जुड़े कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा निष्पक्ष हुए विरोध जारी रखा।
स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों से सदन की कार्रवाई में सहयोग करने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। हालांकि हंगामा जारी रहने पर सदन को पहले दोपहर 12 बजे और फिर 2 बजे तक रोकना पड़ा।
इसके बाद जब सदन की कार्रवाई दोबारा शुरू हुई तो सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को आगे बढ़ाया गया और अंततः लोकसभा ने इसे पारित कर दिया। सदन की कार्रवाई अब अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
