नई दिल्ली. दिल्ली में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष ने चुनाव आयोग पर कथित Vote Chori और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने के आरोप लगाए हैं। राहुल गांधी ने SIR प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अदालत की रजिस्ट्री को याचिका पर सोमवार को ही प्रक्रिया पूरी करने और कमियों को दूर कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि मामले को मंगलवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सके। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ मंगलवार को इस मामले पर सुनवाई करेगी।
राहुल गांधी की याचिका में क्या है मांग?
कांग्रेस की कानूनी टीम ने मतदाता सूची के संशोधन के दौरान कथित अनियमितताओं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विपक्ष ने SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की है।
इस याचिका में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, RJD नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, CPI(M) के एमए बेबी, CPI के डी. राजा, JMM की महुआ माझी, NCP (SP) की सुप्रिया सुले और IUML के ईटी मोहम्मद बशीर समेत कई विपक्षी नेता याचिकाकर्ताओं में शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की प्रक्रिया पूरी करने और उसमें मौजूद किसी भी तकनीकी कमी को दूर करने के लिए रजिस्ट्री को निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई मंगलवार को होनी निर्धारित है।
‘March for Democracy’ में शामिल हुए विपक्षी नेता
INDIA गठबंधन ने सोमवार को अपने मार्च को ‘March for Democracy’ नाम दिया। राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में कई विपक्षी दलों के नेता और सैकड़ों समर्थक इसमें शामिल हुए।
मार्च में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, शशि थरूर, सचिन पायलट और मुकुल वासनिक के अलावा तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष भी शामिल हुईं। CPI के डी. राजा, CPI(M) के एमए बेबी, RJD के तेजस्वी यादव, NCP (SP) की सुप्रिया सुले, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, CPI(ML) के दीपंकर भट्टाचार्य और IUML के ईटी मोहम्मद बशीर समेत अन्य नेताओं ने भी हिस्सा लिया। सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, नंदिता नारायण और AISA की प्रमुख नेहा बोरा भी मौजूद थीं।
नेता और समर्थक पहले Constitution Club में एकत्र हुए। इसके बाद वे चार वातानुकूलित बसों से बाराखंभा रोड जंक्शन की ओर पहुंचे, जहां से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना थी। हालांकि, पुलिस ने भगवान दास रोड पर बैरिकेडिंग के पास मार्च को रोक दिया। इस दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत कुछ नेता एक वाहन के ऊपर चढ़ गए।
राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार से मांगा इस्तीफा
मार्च से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने भाजपा पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों पर सवाल उठाए और दावा किया कि पुलिसकर्मियों को युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि सरकार के भीतर कुछ अधिकारी विपक्ष को सूचनाएं दे रहे हैं।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने और कथित अनियमितताओं के मामले में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को इस्तीफा देकर सरकारी गवाह की भूमिका निभानी चाहिए, क्योंकि उनके अनुसार इस पूरे मामले के पीछे उनसे बड़े लोग हैं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद पर बने रहने नहीं दिया जाएगा।
ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
जंतर-मंतर पर रोक के बाद मार्च ने पकड़ा जोर
विपक्ष का यह मार्च ऐसे समय हुआ, जब दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल की सूची से हटाने का आदेश जारी किया। पुलिस ने इसके स्थान पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल घोषित किया है।
इससे पहले Cockroach Janta Party (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की घोषणा की थी, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद प्रदर्शन स्थल और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर विवाद बढ़ा।
अब SIR प्रक्रिया, कथित Vote Chori और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की मंगलवार की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत के सामने उठाए गए सवालों पर सुनवाई के बाद ही मामले की आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

