नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, यह फैसला संसद परिसर में राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में हुई INDIA गठबंधन के फ्लोर लीडर्स की बैठक में लिया गया। इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी मौजूद थे।
विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी को सदन में बोलने की अनुमति नहीं दी गई। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने स्पीकर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
कब और क्यों लाया जा सकता है प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष बजट सत्र के दूसरे चरण में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है। संसदीय नियमों के अनुसार, इस तरह के प्रस्ताव के लिए 20 दिन का नोटिस देना होता है।
विपक्ष ने प्रस्ताव के लिए कई कारण गिनाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
लोकसभा में विपक्ष के नेता को बहस के दौरान बोलने की अनुमति न देना
महिला सांसदों का नाम लेकर टिप्पणी करने का आरोप
सत्ता पक्ष के सांसदों को अधिक अवसर दिए जाने का आरोप
आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार विपक्ष के नेता को “शैडो प्रधानमंत्री” माना जाता है, लेकिन उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
आठ विपक्षी सांसद निलंबित
हाल ही में सदन में हंगामे के बाद आठ विपक्षी सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया। इन सांसदों पर नियमों का उल्लंघन करने और अध्यक्ष की कुर्सी की ओर कागज फेंकने का आरोप है।
इससे पहले, राहुल गांधी ने 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद पर पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का उल्लेख करने की कोशिश की थी, जिस पर स्पीकर ने आपत्ति जताते हुए उन्हें आगे बोलने की अनुमति नहीं दी।
बजट सत्र में जारी है गतिरोध
बजट सत्र के दौरान लगातार हंगामे की स्थिति बनी हुई है। संसद के दोनों सदनों में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 पर चर्चा जारी है, लेकिन विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर बहस की मांग कर रहा है।
अगर विपक्ष प्रस्ताव लाता है, तो यह लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संसदीय कदम होगा, हालांकि इसे पारित कराने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटाना विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
