नई दिल्ली: विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को लेकर संसद में सियासी हलचल बढ़ गई है। विधेयक को 10 अगस्त के आसपास लोकसभा में लाए जाने की संभावना के बीच कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया है। पार्टी ने शुक्रवार दोपहर तीन पंक्तियों का व्हिप जारी कर सांसदों से 10, 11 और 12 अगस्त को लोकसभा में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने को कहा है। विपक्षी गठबंधन में शामिल अन्य दल भी अपने सांसदों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की तैयारी में हैं।
अमित शाह के सदन में आने की उम्मीद
विपक्ष को आशंका है कि एफसीआरए संशोधन विधेयक गृह मंत्रालय से जुड़ा होने के कारण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इसके चर्चा के समय सदन में मौजूद रह सकते हैं। इसी को देखते हुए विपक्ष चाहता है कि विधेयक पर चर्चा के दौरान उसके सभी सांसद सदन में मौजूद रहें।
कांग्रेस की ओर से अपने सांसदों को जारी निर्देश को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही कह चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
ललदुहोमा ने अमित शाह से की थी मुलाकात
एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। उन्होंने विधेयक को लेकर अपनी चिंताओं से संबंधित एक ज्ञापन गृह मंत्री को सौंपा।
मुलाकात के बाद लालदुहोमा ने बताया था कि अमित शाह ने संकेत दिया है कि विधेयक को 12 अगस्त को लोकसभा में लाया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि गृह मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि विधेयक में पिछली अवधि पर लागू होने वाला कोई प्रावधान नहीं होगा।
कांग्रेस ने सहयोगी दलों से भी मांगा सहयोग
शुक्रवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय में कांग्रेस नेताओं की बैठक हुई। इस बैठक में सहयोगी दलों से कहा गया कि सोमवार से सभी विपक्षी सांसदों की संसद में मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
कांग्रेस का मानना है कि विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष की पूरी संख्या सदन में मौजूद रहना जरूरी है। इससे सरकार के सामने विपक्ष अपनी एकजुटता और राजनीतिक ताकत दिखा सकेगा।
विपक्ष पहले से गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा
मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर सदन में बयान देने की मांग कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर संसद की कार्यवाही कई बार बाधित हुई है।
गुरुवार को राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से कहा था कि वह गृह मंत्री तक विपक्ष की भावनाएं पहुंचाएं और सदन में अमित शाह की मौजूदगी की मांग पर विचार करें।
कांग्रेस ने सरकार पर मुद्दा भटकाने का आरोप लगाया
लोकसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक मणिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी अगले सप्ताह एफसीआरए और परिसीमन से जुड़े विधेयकों के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश कर सकती है।
कांग्रेस का कहना है कि गृह मंत्री को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित कार्रवाई पर सदन में जवाब देना चाहिए। पार्टी एफसीआरए विधेयक पर चर्चा के दौरान भी इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है।
टीएमसी सांसदों को भी संसद में रहने का निर्देश
तृणमूल कांग्रेस ने भी अपने सांसदों को सोमवार से सदन में मौजूद रहने के लिए कहा है। पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक, कुछ दल अपने सांसदों को औपचारिक रूप से व्हिप जारी करते हैं, जबकि कुछ दल अनौपचारिक रूप से निर्देश देते हैं।
विपक्षी दलों के बीच एफसीआरए विधेयक पर एकजुटता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। माना जा रहा है कि विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दे उठा सकता है।
एफसीआरए विधेयक को लेकर क्यों है संवेदनशीलता
विदेशी अंशदान विनियमन कानून के तहत विदेश से मिलने वाले धन को नियंत्रित किया जाता है। देश में कई चर्च और ईसाई संस्थान विदेशी अंशदान के माध्यम से बनाए गए हैं। ऐसे में प्रस्तावित संशोधन को लेकर ईसाई संगठनों और कुछ राजनीतिक दलों में चिंता देखी जा रही है।
विशेष रूप से केरल जैसे राज्यों में ईसाई समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही भाजपा के लिए यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जा रहा है।
सरकार ने पिछली अवधि पर कार्रवाई से किया इनकार
सरकार ने बुधवार को संकेत दिया था कि एफसीआरए संशोधन विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं होगा, जिसके तहत पिछली अवधि के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई की जा सके। इस आश्वासन के बाद विधेयक को लेकर कुछ चिंताओं को दूर करने की कोशिश की गई है।
हालांकि, विपक्षी दलों का रुख फिलहाल बदला नहीं है। विपक्ष विधेयक पर चर्चा में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहा है, लेकिन उसके प्रावधानों का विरोध करने और सरकार को घेरने की रणनीति भी बनाई जा रही है।
10 अगस्त से संसद में बढ़ सकता है सियासी टकराव
एफसीआरए संशोधन विधेयक और गृह मंत्री अमित शाह की संभावित मौजूदगी को लेकर 10 अगस्त से संसद में राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं। कांग्रेस ने अपने सांसदों को तीन दिन सदन में उपस्थित रहने का निर्देश देकर अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है।
अब विपक्षी दल विधेयक पर चर्चा के दौरान एकजुट होकर सरकार के सामने अपनी मांगें रखेंगे। वहीं सरकार की कोशिश होगी कि विधेयक को संसद से आगे बढ़ाया जाए। ऐसे में मानसून सत्र के अंतिम दिनों में एफसीआरए संशोधन विधेयक संसद की राजनीति का प्रमुख मुद्दा बन सकता है।
