नई दिल्ली. राजस्थान सरकार ने अगस्त 2026 में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नई राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति को मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने, गांवों में नए कारोबार के अवसर पैदा करने और राज्य की कृषि उपज को प्रसंस्करण के लिए दूसरे राज्यों में भेजने की जरूरत कम करना है। नई नीति के तहत कृषि आधारित उद्योगों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ भंडारण और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
नई नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
सरकार का मानना है कि राजस्थान में कृषि उत्पादन बड़े स्तर पर होता है, लेकिन पर्याप्त प्रसंस्करण सुविधाओं के अभाव में कच्चा माल कई बार दूसरे राज्यों में चला जाता है। नई नीति के जरिए इसी स्थिति को बदलने की कोशिश की जा रही है।
राज्य में ही कृषि उत्पादों की सफाई, पैकेजिंग, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन की सुविधाएं विकसित होने से किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्योग और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत सहायता
नई नीति में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने के लिए पूंजीगत सहायता का प्रावधान किया गया है। 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी।
वहीं 50 लाख रुपये से अधिक और 1 करोड़ रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत सहायता का प्रावधान है। 1 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता दी जाएगी। हालांकि, कुल सहायता की अधिकतम सीमा 1.5 करोड़ रुपये तय की गई है।
महिलाओं और वंचित वर्गों को अतिरिक्त लाभ
नई नीति में कुछ विशेष वर्गों को अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की व्यवस्था की गई है। महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उपयोजना क्षेत्रों में कारोबार शुरू करने वाले उद्यमियों को अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजीगत सहायता दी जाएगी।
सरकार का उद्देश्य इन वर्गों को कृषि आधारित उद्योगों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी बढ़ाना है।
भंडारण और शीतगृह को भी मिलेगा प्रोत्साहन
कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के साथ उनके सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था को भी नई नीति में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। शीतगृह, अनाज भंडारण केंद्र, पैक हाउस और आधुनिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
इससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। किसानों को अपनी उपज तुरंत कम कीमत पर बेचने की मजबूरी से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
किन कृषि उत्पादों पर रहेगा जोर
नई नीति के दायरे में फल, सब्जियां, मसाले, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय फसलें, शहद, डेयरी उत्पाद और पशु आहार जैसे कई क्षेत्र शामिल किए गए हैं।
इन उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण होने से तैयार उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे किसानों और प्रसंस्करण इकाइयों के बीच सीधा जुड़ाव मजबूत होने की संभावना है।
मोटे अनाज के लिए बनेगी विशेष एजेंसी
राजस्थान में मोटे अनाज के उत्पादन और उससे जुड़े कारोबार को बढ़ावा देने के लिए श्री अन्न प्रोत्साहन एजेंसी स्थापित की जाएगी। इसका उद्देश्य मोटे अनाज के प्रसंस्करण, उत्पाद निर्माण और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देना होगा।
मोटे अनाज से बने खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ किसानों के लिए भी नए बाजार तैयार हो सकते हैं। सरकार इस क्षेत्र को ग्रामीण रोजगार और कृषि आधारित कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की दिशा में काम करेगी।
आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर जोर
नई नीति में खेत से बाजार तक कृषि उत्पाद पहुंचाने की पूरी व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। पैक हाउस, भंडारण केंद्र, अनाज भंडार और शीत श्रृंखला जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।
आधुनिक आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने से किसानों की उपज लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकेगी और उसे उचित समय पर बाजार में पहुंचाया जा सकेगा। इससे कृषि उत्पादों की बर्बादी कम करने और किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निवेश प्रोत्साहन योजना से भी मिलेगा लाभ
शीतगृह, अनाज भंडारण, निर्यात केंद्र और कृषि प्रसंस्करण से जुड़ी परियोजनाओं को राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत भी उपलब्ध सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
इससे राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। सरकार की कोशिश है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को एक ऐसा वातावरण मिले, जहां उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और बाजार तक पूरी व्यवस्था राज्य में विकसित की जा सके।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
नई नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना है। कृषि उत्पादों को केवल कच्चे रूप में बेचने के बजाय उनका प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन करने से उत्पाद की कीमत बढ़ सकती है।
अगर राज्य में ही प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित होती हैं तो किसानों को स्थानीय स्तर पर बाजार मिलने के साथ परिवहन लागत और समय की भी बचत हो सकती है। इससे कृषि क्षेत्र के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान में कृषि आधारित उद्योगों को नई दिशा
राजस्थान सरकार की नई कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति के जरिए खेती को उद्योग और बाजार से जोड़ने की कोशिश की गई है। आर्थिक सहायता, अतिरिक्त प्रोत्साहन, भंडारण सुविधाओं और बेहतर आपूर्ति व्यवस्था के जरिए राज्य में कृषि आधारित कारोबार को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
नई नीति के लागू होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यम शुरू होने, रोजगार बढ़ने और किसानों की उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है। साथ ही राज्य से कच्चे कृषि उत्पादों के दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है और राजस्थान में ही कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन को बढ़ावा मिलेगा।
