नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन उपलब्धता, राष्ट्रीय सुरक्षा और जरूरी वस्तुओं की सप्लाई पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद दूसरी CCS बैठक है, जिसमें केंद्र सरकार ने हालात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की।
ऊर्जा संकट और सप्लाई चेन पर सरकार की नजर
बैठक में खासतौर पर कच्चे तेल, गैस, ईंधन आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर को लेकर चर्चा हुई। सरकार ने यह आकलन किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का असर भारत में ईंधन कीमतों, ऊर्जा सुरक्षा और आम नागरिकों की जरूरतों पर किस तरह पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए सभी मंत्रालय मिलकर काम करें और जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनी रहे।
बैठक में शामिल हुए कई बड़े मंत्री और शीर्ष अधिकारी
प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में कई वरिष्ठ मंत्री और शीर्ष अधिकारी शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से:
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
गृह मंत्री अमित शाह
विदेश मंत्री एस. जयशंकर
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव
ऊर्जा और पेट्रोलियम से जुड़े कई वरिष्ठ मंत्री
इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास, तथा कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी बैठक में मौजूद रहे।
पीएम मोदी बोले- संकट को राजनीति का विषय न बनाएं
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में पश्चिम एशिया की स्थिति को “चुनौतीपूर्ण” बताया था। उन्होंने कहा था कि यह समय एकजुट होकर देशहित में काम करने का है।
पीएम मोदी ने साफ कहा था कि ऐसे संकट के समय स्वार्थ की राजनीति की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अफवाहों से बचने और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की भी अपील की थी।
22 मार्च को भी हुई थी पहली बड़ी समीक्षा बैठक
इससे पहले 22 मार्च को भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसी तरह की CCS बैठक की थी। उस बैठक में भी खाद्य पदार्थों, ईंधन, गैस और जरूरी सप्लाई की उपलब्धता पर चर्चा हुई थी।
सरकार ने तब माना था कि पश्चिम एशिया का यह संघर्ष पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है और भारत को इसके आर्थिक व रणनीतिक असर से बचाने के लिए पहले से तैयारी जरूरी है।
‘यह राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा’— पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मार्च को भी पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि यह संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दे रहा है और यह भारत के लिए राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा है।
उन्होंने कहा था कि इस चुनौती से निपटने के लिए शांति, धैर्य और जन-जागरूकता की जरूरत है। साथ ही सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं से निपटने के प्रयास कर रही है।
सरकार का फोकस: आम जनता पर असर कम करना
केंद्र सरकार फिलहाल इस बात पर खास ध्यान दे रही है कि पश्चिम एशिया संकट का असर भारत में:
पेट्रोल-डीजल और गैस की उपलब्धता
जरूरी खाद्य वस्तुओं की सप्लाई
माल ढुलाई और आयात-निर्यात
महंगाई और बाजार की स्थिरता
पर कम से कम पड़े। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालयों के बीच तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
क्या है बड़ा संदेश?
प्रधानमंत्री मोदी की यह बैठक साफ संकेत देती है कि केंद्र सरकार पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और आम जनता की जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है।
आने वाले दिनों में अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो भारत सरकार ईंधन, खाद्य और रणनीतिक आपूर्ति को लेकर और भी बड़े कदम उठा सकती है।
