नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैरकपुर रैली को पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के अंतिम चरण की एक अहम सभा माना जा रहा है। इस रैली में उन्होंने जहां भाजपा की संभावित जीत को लेकर आत्मविश्वास जताया, वहीं राज्य की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए।
TMC पर तीखा हमला
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल में उद्योगों की स्थिति कमजोर हुई है और निवेश घटा है, जिसके कारण रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में “सिंडिकेट राज” और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ विकास में बाधा बन रही हैं। उनके अनुसार, अगर केंद्र और राज्य एक साथ काम करें (डबल इंजन सरकार), तो पश्चिम बंगाल तेजी से विकास की राह पर लौट सकता है।
चुनावी रैली में क्या बोले पीएम मोदी?
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उनके भाषण का प्रमुख हिस्सा रहा। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे “परिवर्तन” के लिए वोट करें और भाजपा को मौका दें।
कोलकाता के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि शहर को “लंदन जैसा बनाने” के जो वादे पहले किए गए थे, वे पूरे नहीं हुए। इसके साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि इससे शहर और राज्य की सामाजिक संरचना पर असर पड़ा है।
अपने भाषण में उन्होंने युवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए रोजगार को बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने पांच प्रमुख वादों का उल्लेख किया, जिनमें सरकारी नौकरियों की समय पर भर्ती प्रक्रिया, खाली पदों को भरना, कौशल आधारित रोजगार, 7वें वेतन आयोग के लाभ और ग्रामीण रोजगार योजनाओं को मजबूत करना शामिल है।
युवाओं के लिए 5 बड़े वादे
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह रैली भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने और टीएमसी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, टीएमसी लगातार भाजपा के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए खारिज करती रही है।
चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मतदाता इस चुनाव को लेकर काफी सक्रिय हैं। अब सभी की नजर 29 अप्रैल के दूसरे चरण और 4 मई के नतीजों पर है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैरकपुर रैली को पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के अंतिम चरण की एक अहम सभा माना जा रहा है। इस रैली में उन्होंने जहां भाजपा की संभावित जीत को लेकर आत्मविश्वास जताया, वहीं राज्य की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए।
मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम बंगाल में उद्योगों की स्थिति कमजोर हुई है और निवेश घटा है, जिसके कारण रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में “सिंडिकेट राज” और भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ विकास में बाधा बन रही हैं। उनके अनुसार, अगर केंद्र और राज्य एक साथ काम करें (डबल इंजन सरकार), तो पश्चिम बंगाल तेजी से विकास की राह पर लौट सकता है।
महिला सुरक्षा पर बयान
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उनके भाषण का प्रमुख हिस्सा रहा। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे “परिवर्तन” के लिए वोट करें और भाजपा को मौका दें। कोलकाता के विकास को लेकर उन्होंने कहा कि शहर को “लंदन जैसा बनाने” के जो वादे पहले किए गए थे, वे पूरे नहीं हुए। इसके साथ ही उन्होंने अवैध घुसपैठ के मुद्दे को भी उठाया और कहा कि इससे शहर और राज्य की सामाजिक संरचना पर असर पड़ा है। अपने भाषण में उन्होंने युवाओं पर विशेष ध्यान देते हुए रोजगार को बड़ा मुद्दा बनाया। उन्होंने पांच प्रमुख वादों का उल्लेख किया, जिनमें सरकारी नौकरियों की समय पर भर्ती प्रक्रिया, खाली पदों को भरना, कौशल आधारित रोजगार, 7वें वेतन आयोग के लाभ और ग्रामीण रोजगार योजनाओं को मजबूत करना शामिल है।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो यह रैली भाजपा की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह पश्चिम बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने और टीएमसी के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं, टीएमसी लगातार भाजपा के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए खारिज करती रही है। चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मतदाता इस चुनाव को लेकर काफी सक्रिय हैं। अब सभी की नजर 29 अप्रैल के दूसरे चरण और 4 मई के नतीजों पर है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।
