नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में आंगनवाड़ी व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा इसे जनभागीदारी से जुड़े आंदोलन का रूप देने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखे गए एक लेख को सोशल मीडिया पर साझा किया। इस लेख में मातृ वंदना योजना के 10 वर्ष पूरे होने और पोषण माह के दौरान चलाए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आंगनवाड़ी व्यवस्था को केवल सरकारी कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर आगे बढ़ाने की जरूरत है।
आंगनवाड़ी को जन आंदोलन बनाने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस लेख को साझा किया, उसमें “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” की सोच को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य आंगनवाड़ी केंद्रों को स्थानीय समुदाय से जोड़ना और बच्चों, महिलाओं तथा किशोरियों के पोषण एवं स्वास्थ्य को लेकर लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि कुपोषण जैसी चुनौती से निपटने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
बच्चों और महिलाओं के पोषण पर खास ध्यान
लेख में बताया गया है कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए बच्चों, महिलाओं और किशोरियों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। Direct Benefit Transfer (DBT), सामाजिक ऑडिट और पौष्टिक भोजन जैसी व्यवस्थाओं को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य जरूरतमंद लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना और पोषण से जुड़ी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना है।
प्रधानमंत्री ने भी इन प्रयासों को कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका संदेश है कि मजबूत पोषण व्यवस्था ही स्वस्थ समाज और विकसित देश की नींव तैयार कर सकती है।
आंगनवाड़ी समाज से अलग व्यवस्था नहीं
महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने अपने लेख में कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र समाज से अलग कोई व्यवस्था नहीं हैं। ये स्थानीय मोहल्लों और गांवों का अभिन्न हिस्सा हैं। इसलिए इनके बेहतर संचालन और प्रभावी कामकाज में स्थानीय लोगों की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बच्चों और महिलाओं तक पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में समुदाय के सहयोग से इन केंद्रों की सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सकता है।
गर्भावस्था से ही शुरू होनी चाहिए बच्चे के स्वास्थ्य की देखभाल
अन्नपूर्णा देवी ने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की लड़ाई केवल बच्चे के जन्म के बाद शुरू नहीं होनी चाहिए। इसकी शुरुआत गर्भावस्था के दौरान मां के पोषण और स्वास्थ्य की देखभाल से होनी जरूरी है। मां का पर्याप्त पोषण और उचित देखभाल बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।
इसी सोच के तहत मातृ स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं के पोषण और बच्चों की शुरुआती देखभाल पर लगातार ध्यान दिया जा रहा है। सरकार की योजनाओं के जरिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं तक सहायता पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
कुपोषण मुक्त भारत की दिशा में प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में इन पहलों को Viksit Bharat के लक्ष्य से भी जोड़ा। सरकार का उद्देश्य बच्चों को स्वस्थ और महिलाओं को बेहतर पोषण उपलब्ध कराते हुए देश को कुपोषण की समस्या से मुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ना है।
आंगनवाड़ी केंद्र इस अभियान में जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार की योजनाओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की मेहनत और समाज की भागीदारी को एक साथ जोड़कर पोषण व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री का संदेश इसी सामूहिक प्रयास को आगे बढ़ाने और “हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी” की भावना को जन-जन तक पहुंचाने पर केंद्रित है।
