नई दिल्ली: केंद्र सरकार की PM SVANidhi योजना के तहत अब तक 1 करोड़ से अधिक लोन वितरित किए जा चुके हैं। इन ऋणों की कुल राशि 17,115 करोड़ रुपये से अधिक है। यह जानकारी आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री तोखन साहू ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब के दौरान दी।सरकार की यह योजना शहरी क्षेत्रों में रेहड़ी-पटरी और छोटे फुटपाथ विक्रेताओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए शुरू की गई थी, ताकि वे बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी (working capital) के रूप में लोन लेकर अपना कारोबार आगे बढ़ा सकें।
जून 2020 में शुरू हुई थी योजना
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) योजना की शुरुआत जून 2020 में की गई थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहरी स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी (collateral-free) ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने छोटे व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें या उसे बढ़ा सकें। कोरोना महामारी के बाद जब लाखों छोटे विक्रेताओं का रोजगार प्रभावित हुआ था, तब यह योजना उनके लिए आर्थिक सहारा बनकर सामने आई।
पहली और दूसरी किस्त में कितना मिलता है लोन?
राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि योजना के तहत: पहली किस्त में स्ट्रीट वेंडर्स को 15,000 रुपये का लोन दिया जाता है,
दूसरी किस्त में उन्हें 25,000 रुपये तक का ऋण मिलता है। यह राशि विक्रेताओं को छोटे स्तर पर सामान खरीदने, दुकान/ठेला चलाने, स्टॉक बढ़ाने और रोजमर्रा के व्यापार को सुचारू रखने में मदद करती है।
योजना में क्या हुआ नया बदलाव?
सरकार ने इस योजना को और अधिक लाभकारी बनाने के लिए इसमें कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं। अब पुनर्गठित (restructured) PM SVANidhi योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को सिर्फ डिजिटल रिटेल ट्रांजैक्शन पर ही नहीं, बल्कि थोक खरीद (wholesale purchases) पर भी कैशबैक का लाभ मिलेगा। इससे छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को न सिर्फ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि थोक में सस्ता सामान खरीदने में भी मदद मिलेगी।
स्ट्रीट वेंडर्स के लिए क्यों अहम है यह योजना?
देशभर में लाखों लोग फुटपाथ, गली-मोहल्लों और बाजारों में छोटे स्तर पर व्यापार करते हैं। इनमें सब्जी बेचने वाले, फल विक्रेता, चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले, कपड़े, खिलौने और अन्य रोजमर्रा की चीजें बेचने वाले शामिल हैं। अक्सर इन लोगों के पास बैंक से लोन लेने के लिए गारंटी या औपचारिक दस्तावेज नहीं होते। ऐसे में PM SVANidhi जैसी योजना उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने का काम करती है।
डिजिटल और आत्मनिर्भर भारत को भी मिल रहा बढ़ावा
यह योजना सिर्फ ऋण देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए सरकार डिजिटल लेनदेन, आत्मनिर्भरता और छोटे कारोबारियों की वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा दे रही है। कैशबैक और आसान ऋण जैसी सुविधाओं से स्ट्रीट वेंडर्स अब बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, जिससे उनके लिए भविष्य में और अधिक आर्थिक अवसर खुल सकते हैं।
सरकार के लिए भी बड़ी उपलब्धि
1 करोड़ से अधिक लोन और 17,115 करोड़ रुपये का वितरण इस बात का संकेत है कि PM SVANidhi योजना जमीनी स्तर पर प्रभावी साबित हुई है। यह योजना शहरी गरीब और छोटे व्यापारियों को आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता देने की दिशा में सरकार की एक बड़ी पहल मानी जा रही है। PM SVANidhi योजना ने देश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को बिना गारंटी लोन, डिजिटल प्रोत्साहन और व्यापार बढ़ाने का अवसर दिया है। अब तक 17,115 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरण के साथ यह योजना छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम बनकर उभरी है।
