नई दिल्ली: भारत औद्योगिक विकास योजना (BHAVYA) के तहत देशभर में 100 विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित करने के लिए ऑपरेशनल गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इस महत्वाकांक्षी योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने इस योजना के लिए 33,660 करोड़ रुपये का बजट तय किया है और इसे वित्त वर्ष 2027 से 2032 के बीच लागू किया जाएगा।
निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा
BHAVYA योजना का उद्देश्य भारत के मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना और निवेश के लिए तैयार आधुनिक औद्योगिक हब विकसित करना है। इन इंडस्ट्रियल पार्कों में प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, भरोसेमंद बिजली-पानी सेवाएं, डिजिटल गवर्नेंस सिस्टम और सतत विकास सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
यह योजना Make in India और PM Gati Shakti National Master Plan के लक्ष्यों के अनुरूप तैयार की गई है।
पहले चरण में चुने जाएंगे 50 इंडस्ट्रियल पार्क
सरकार ने बताया कि पहले चरण में अधिकतम 50 इंडस्ट्रियल पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा। प्रस्तावों का मूल्यांकन बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता, कनेक्टिविटी, औद्योगिक इकोसिस्टम, डिजिटल तैयारी और दीर्घकालिक स्थिरता के आधार पर किया जाएगा।
इस योजना में ग्रीनफील्ड और पात्र ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार की परियोजनाओं को शामिल किया गया है।
SPV मॉडल पर होगा विकास
गाइडलाइंस के अनुसार, औद्योगिक पार्कों का विकास स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) मॉडल के तहत किया जाएगा, जिन्हें Companies Act, 2013 के तहत पंजीकृत किया जाएगा। National Industrial Corridor Development Corporation (NICDC) इस योजना में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी की भूमिका निभाएगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे इंडस्ट्रियल हब
योजना के तहत विकसित होने वाले औद्योगिक पार्कों में श्रमिक आवास, परीक्षण प्रयोगशालाएं, नवीकरणीय ऊर्जा ढांचा, कॉमन ट्रीटमेंट सुविधाएं और डिजिटल सिंगल-विंडो सिस्टम जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
मैदानी राज्यों में न्यूनतम 100 एकड़ और पहाड़ी एवं पूर्वोत्तर राज्यों में 25 एकड़ भूमि की आवश्यकता तय की गई है। वहीं 1,000 एकड़ तक के बड़े पार्कों पर भी विचार किया जा सकता है।
रोजगार और निवेश बढ़ने की उम्मीद
सरकार का मानना है कि बेहतर कारोबारी माहौल, तेज मंजूरी प्रक्रिया और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के जरिए यह योजना घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करेगी। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

