नई दिल्ली: बढ़ती यात्री मांग और ट्रेनों में लगातार बढ़ रही भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने पिछले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर सेवाओं का विस्तार किया है। रेलवे ने 2021-22 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) के दौरान 1,024 नई ट्रेनें शुरू कीं, 907 ट्रेनों का विस्तार किया, 168 ट्रेनों की आवृत्ति बढ़ाई और 4,651 कोच स्थायी रूप से बढ़ाए हैं।
रेलवे के अनुसार, पीक सीजन और लोकप्रिय रूट्स पर ट्रेनों में सीटों की मांग काफी अधिक रहती है, जबकि कम व्यस्त समय में कुछ रूट्स पर उपयोग अपेक्षाकृत कम रहता है। ऐसे में रेलवे लगातार वेटिंग लिस्ट और यात्रियों की मांग की समीक्षा कर सेवाओं में बदलाव कर रहा है।
वेटिंग लिस्ट पर रेलवे की नजर, मांग के अनुसार बढ़ाई जा रही क्षमता
रेल मंत्रालय ने बताया कि यात्रियों की अतिरिक्त मांग को पूरा करने के लिए रेलवे कई स्तरों पर काम कर रहा है। इसमें नई ट्रेनें चलाना, मौजूदा ट्रेनों की संख्या और फ्रीक्वेंसी बढ़ाना, रूट विस्तार और कोच संख्या में इजाफा शामिल है।
साथ ही, वेटिंग लिस्ट की सीमा को भी अब ट्रेन में उपलब्ध सीटों और बर्थ के हिसाब से तार्किक बनाया गया है, ताकि टिकट बुकिंग प्रक्रिया अधिक संतुलित हो सके।
बिहार समेत पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों को भी मिला फायदा
रेलवे नेटवर्क राज्य सीमाओं के पार फैला हुआ है, इसलिए ट्रेन सेवाएं पूरे नेटवर्क की जरूरत के हिसाब से शुरू की जाती हैं।
हालांकि, 2021-22 से 2025-26 (फरवरी 2026 तक) के बीच रेलवे ने 444 नई ट्रेन सेवाएं शुरू कीं, जो पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के विभिन्न स्टेशनों की जरूरतों को पूरा करती हैं।
इनमें बिहार राज्य के स्टेशनों को सेवा देने वाली 75 जोड़ी ट्रेनें भी शामिल हैं।
जनरल और स्लीपर यात्रियों के लिए रेलवे का फोकस
रेलवे ने खासतौर पर कम और मध्यम आय वर्ग के यात्रियों को ध्यान में रखते हुए जनरल और नॉन-एसी यात्रा सुविधाओं में बड़ा विस्तार किया है।
रेलवे के मुताबिक,
वित्त वर्ष 2024-25 में लंबी दूरी की ट्रेनों में 1,250 जनरल कोच लगाए गए
वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 (फरवरी 2026 तक) में 860 कोचों का स्थायी ऑगमेंटेशन किया गया
17,000 नॉन-एसी कोच बनाए जा रहे
रेलवे ने बताया कि किफायती यात्रा को बढ़ावा देने के लिए 17,000 नॉन-एसी कोच (जनरल और स्लीपर) के निर्माण का काम भी शुरू किया गया है।
यह कदम खास तौर पर उन यात्रियों के लिए अहम माना जा रहा है, जो कम किराए में लंबी दूरी की यात्रा करना चाहते हैं।
रेलवे के कुल कोचों में 70% नॉन-एसी
भारतीय रेलवे के कुल कोचों में अब भी नॉन-एसी कोचों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार:
कोचों का वितरण
नॉन-एसी कोच (जनरल और स्लीपर): लगभग 62,000
एसी कोच: लगभग 27,000
कुल कोच: लगभग 89,000
यानी कुल कोचों में करीब 70% हिस्सेदारी नॉन-एसी कोचों की है, जबकि 30% एसी कोच हैं।
जनरल कोच में यात्रा करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी
रेलवे के मुताबिक, जनरल और अनारक्षित कोचों में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है।
जनरल/अनारक्षित कोचों में यात्रियों की संख्या
2020-21: 99 करोड़ (कोविड वर्ष)
2021-22: 275 करोड़ (कोविड वर्ष)
2022-23: 553 करोड़
2023-24: 609 करोड़
2024-25: 651 करोड़
इन आंकड़ों से साफ है कि महामारी के बाद सस्ती और सुलभ रेल यात्रा की मांग तेज़ी से बढ़ी है।
नॉन-एसी यात्रियों के लिए सीटों की उपलब्धता भी बढ़ी
रेलवे ने बताया कि नॉन-एसी यात्रियों के लिए सीटों की उपलब्धता भी लगातार बढ़ाई गई है।
सीटों का वितरण
नॉन-एसी सीटें: लगभग 54 लाख
एसी सीटें: लगभग 15 लाख
कुल सीटें: लगभग 69 लाख
यानी कुल सीटों में 78% हिस्सा नॉन-एसी यात्रियों के लिए है, जबकि 22% सीटें एसी यात्रियों के लिए उपलब्ध हैं।
22 कोच वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में 12 नॉन-एसी कोच का प्रावधान
रेलवे की मौजूदा कोच संरचना नीति के तहत 22 कोच वाली मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में:
12 कोच जनरल और स्लीपर (नॉन-एसी)
8 कोच एसी
रखे जाने का प्रावधान है।
रेलवे का कहना है कि इससे जनरल और स्लीपर वर्ग के यात्रियों को अधिक सीटें और यात्रा विकल्प मिलते हैं।
MEMU/EMU और अनारक्षित ट्रेनों से भी राहत
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में ही नहीं, बल्कि MEMU, EMU और अन्य अनारक्षित नॉन-एसी पैसेंजर ट्रेनों के जरिए भी बड़ी संख्या में यात्रियों को सस्ती यात्रा सुविधा दी जा रही है।
ये सेवाएं नियमित ट्रेनों में उपलब्ध अनारक्षित कोचों के अलावा अतिरिक्त सुविधा के रूप में चलाई जाती हैं।
त्योहारों और छुट्टियों में स्पेशल ट्रेनों का बड़ा सहारा
रेलवे हर साल त्योहारों, गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की भीड़ को संभालने के लिए स्पेशल ट्रेनें भी चलाता है।
स्पेशल ट्रेन ट्रिप्स का आंकड़ा
2023-24: लगभग 40,500 ट्रिप्स
2024-25: लगभग 85,400 ट्रिप्स
2025-26 (फरवरी 2026 तक): लगभग 74,800 ट्रिप्स यह आंकड़ा बताता है कि त्योहारों और छुट्टियों के दौरान रेलवे ने अतिरिक्त मांग को संभालने के लिए बड़े स्तर पर ऑपरेशन चलाया।
लोकसभा में अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी
यह जानकारी रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी। रेलवे के इन आंकड़ों से साफ है कि सरकार अब नॉन-एसी, जनरल और सस्ती रेल यात्रा पर ज्यादा जोर दे रही है, ताकि आम यात्रियों को राहत मिल सके।
