मवेशी खरीद-बिक्री मामले में केन्द्र को सर्वोच्च न्यायालय का नोटिस

पशु बाजार में मवेशियों के बध के लिए खरीद-बिक्री पर रोक लगाने वाली  केन्द्र सरकार की अधिसूचना पर सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र को नोटिस जारी किया है. जस्टिस संजय किसन कौल और जस्टिस आर के अग्रवाल की वोकेशनल बैच ने दो विभिन्न जनहित याचिका के सुनवाई के बाद यह नोटिस जारी किया. कोर्ट ने केन्द्र सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को होगी.

25 मई को पर्यावरण मंत्रालय ने ‘पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम-1960’ में संशोधन के बाद पशुओं के बाजार में गाय और भैंस के बध के लिए खरीद-बिक्री पर रोक लगाने संबंधी अधिसूचना जारी की थी.

हैदराबाद स्थित एक एनजीओ और एक अन्य अपीलकर्ता ने केन्द्र सरकार के इस फैसले के विरोध में जनहित याचिक दायक की थी. इससे पहले केरल हाइकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। बाद में, मद्रास हाइकोर्ट ने केन्द्र सरकार के इस नोटिस पर अंतरिम स्थगन का आदेश दिया था। अंत में, सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर जनहित याचिक दायर की गई.

अपीलकर्ता की दलील है कि सरकार का यह फैसला मनमाना और गैरकानूनी है. उनके अनुसार यह अधिसूचना पशु क्रूरता अधिनियम-1960 का भी उल्लंघन करता है. बतौर अपीलकर्ता फैसले के बाद किसानों और व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा. इससे पूरी तरह से किसानों और व्यापारियों का रोजगार छीनने वाला है.

हैदराबाद के मोहम्मद अब्दुल फहीम कुरैशी की ओर से सात जून को दायर की गई याचिका में कहा गया है कि अधिसूचना में मवेशियों की कुर्बानी देने की धार्मिक आजादी के खिलाफ है और भोजन के लिए मवेशियों के वध पर प्रतिबंध संविधान के तहत नागरिकों को प्राप्त भोजन के अधिकार, निजता एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन है.

याचिका में यह भी कहा गया है कि केरल, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और कर्नाटक जैसे राज्यों ने पहले ही कह दिया है कि वह केन्द्र के इस प्रतिबंध को लागू नहीं करेंगे क्योंकि इससे उक्त व्यावसाय में शामिल लोगों की जीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. उन्होनें याचिका में संविधान की धारा 29 का जिक्र कहते हुए गाय-भैंस के मांस का खाना व कुर्बानी को ‘समुदायों’  के सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बताया और इसे संरक्षण देने के संवैधानिक अधिकार की बात कही.

केद्र सरकार के मुताबिक गोवध कानून को पशु बाजारों में जारी अनियमितताओं को दूर करने को लेकर बनाया गया है. इसका उद्देश्य मवेशियों की खरीद और बिक्री पर रोक लगाना नहीं है.