नई दिल्ली. राजस्थान में इस बार Monsoon की धीमी शुरुआत और बीच में पड़े सूखे दौर ने खरीफ़ की बुआई की रफ्तार पर बड़ा असर डाला है। समय पर पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान अभी भी अगली अच्छी वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले वर्ष की तुलना में इस बार खरीफ़ फसलों का बुआई क्षेत्र करीब 20 से 25 प्रतिशत तक कम है। हालांकि, आने वाले दिनों में अच्छी बारिश होने पर बुआई की गति दोबारा तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है।
बारिश की कमी से कई फसलें लक्ष्य से पीछे
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य की अधिकांश खरीफ़ फसलें मानसून पर निर्भर हैं। इस बार Pre-Monsoon Rain कमजोर रहने और मानसून के देर से सक्रिय होने के कारण किसानों को समय पर बुआई का अवसर नहीं मिल सका। जुलाई की शुरुआत में कुछ दिनों तक अच्छी बारिश हुई, लेकिन उसके बाद बारिश थमने से पहले से बोई गई फसलों पर भी संकट गहराने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो कई किसानों को दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है।
खरीफ़ बुआई का ताजा आंकड़ा
9 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में Coarse Cereals की लगभग 61 प्रतिशत, Pulses की 58 प्रतिशत, Oilseeds की 60 प्रतिशत और अन्य खरीफ़ फसलों की करीब 56 प्रतिशत बुआई ही निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले पूरी हो सकी है।
बाजरा की 40.50 लाख हेक्टेयर लक्ष्य भूमि के मुकाबले करीब 24.65 लाख हेक्टेयर में बुआई हुई है, यानी लगभग 61 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ है। ज्वार की बुआई 51 प्रतिशत और मक्का की 69 प्रतिशत तक पहुंची है। दलहनी फसलों में मूंग की बुआई लगभग 60 प्रतिशत रही, जबकि मोठ और उड़द की बुआई केवल 44-44 प्रतिशत तक ही सीमित है।
Guar की बुआई सबसे ज्यादा पिछड़ी
तिलहनी फसलों में Groundnut (Moongfali) सबसे बेहतर स्थिति में है। 11.50 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 9.19 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी है, जो लगभग 80 प्रतिशत लक्ष्य के बराबर है। वहीं Soybean की बुआई 61 प्रतिशत और Cotton की 72 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
इसके विपरीत राजस्थान की प्रमुख नकदी फसल Guar सबसे अधिक प्रभावित हुई है। 25.50 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 9.82 लाख हेक्टेयर में ही बुआई हो सकी है, यानी लक्ष्य का महज 39 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हुआ है।
अच्छी बारिश से सुधर सकती है स्थिति
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय होता है तो Guar, Bajra और Moong जैसी फसलों की बुआई तेजी से बढ़ सकती है। इन फसलों को अपेक्षाकृत कम पानी की जरूरत होती है और इन्हें देर से बोने पर भी बेहतर उत्पादन की संभावना बनी रहती है। राजस्थान देश का सबसे बड़ा Guar Producing State है और राष्ट्रीय उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है। ऐसे में आगामी बारिश राज्य के किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी।
