नई दिल्ली. राजस्थान में Panchayat Elections 2026 और Urban Local Body Elections की घोषणा से पहले राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। सत्तारूढ़ BJP ने सातों संभागों के लिए Regional Election Management Committees का गठन कर चुनावी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। वहीं, Congress ने भी अगस्त के पहले सप्ताह से संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने का ऐलान किया है।
BJP ने हर संभाग में बनाई चुनाव संचालन समिति
भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश के सभी सात संभागों में तीन-तीन वरिष्ठ नेताओं को चुनाव संचालन की जिम्मेदारी सौंपी है। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य चुनावी रणनीति तैयार करना, संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और स्थानीय स्तर पर चुनाव प्रबंधन को मजबूत करना है।
पार्टी ने समितियों में सांसद, पूर्व मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और संगठन के अनुभवी नेताओं को शामिल किया है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि भाजपा निकाय और पंचायत चुनावों को भी विधानसभा चुनाव जितनी गंभीरता से लड़ने की तैयारी कर रही है।
संभागवार नेताओं को मिली जिम्मेदारी
भाजपा द्वारा घोषित समितियों में संभागवार निम्नलिखित नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है—
जयपुर संभाग: घनश्याम तिवाड़ी, प्रभुलाल सैनी, लालचंद कटारिया
जोधपुर संभाग: ओंकार सिंह लखावत, सी.आर. चौधरी, हेमराज मीणा
भरतपुर संभाग: अरुण चतुर्वेदी, हरीराम रिणवा, शंकर सिंह राजपुरोहित
कोटा संभाग: सी.पी. जोशी, अर्जुनलाल मीणा, अजीत मेहता
अजमेर संभाग: अशोक परनामी, ज्योति मिर्धा, देवजी पटेल
उदयपुर संभाग: राजेंद्र राठौड़, नारायण पंचारिया, जसकौर मीणा
बीकानेर संभाग: मुकेश दाधीच, जसवंत सिंह विश्नोई, संतोष अहलावत
इन नेताओं में कई वर्तमान बोर्ड और आयोगों के अध्यक्ष भी शामिल हैं, जिन्हें संगठनात्मक अनुभव का लाभ चुनावी रणनीति में मिलेगा।
कांग्रेस भी अगस्त से तेज करेगी अभियान
दूसरी ओर, Rajasthan Congress ने भी आगामी निकाय और पंचायत चुनावों के लिए अपनी तैयारियां तेज करने का फैसला किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Govind Singh Dotasra ने कहा कि पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में है और अगस्त के पहले सप्ताह से प्रदेशभर में संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी जाएंगी।
बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर फोकस
कांग्रेस की योजना के तहत District Congress Committees, City Congress Committees और Block Congress Committees की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में चुनावी रणनीति, संगठन की मजबूती और स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों की समीक्षा की जाएगी।
इसके अलावा जिला प्रभारियों को कार्यकर्ताओं और आम जनता से सीधे संवाद कर Ground Feedback जुटाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। यही फीडबैक आगे की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक जिम्मेदारियों को तय करने का आधार बनेगा।
दोनों दलों की नजर स्थानीय चुनावों पर
राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनावों को आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा जहां अपने मजबूत संगठन और अनुभवी नेताओं के दम पर चुनावी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय कर मुकाबले को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
