नई दिल्ली. राजस्थान में Political Appointments को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। करीब 11 महीने के लंबे अंतराल के बाद राज्य सरकार ने राजनीतिक और संवैधानिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। हाल ही में RPSC (Rajasthan Public Service Commission) और Rajasthan Board of Secondary Education में नई नियुक्तियों के बाद अब विभिन्न बोर्ड, आयोग और अकादमियों में लंबे समय से खाली पड़े पदों पर नियुक्तियों की संभावना बढ़ गई है।
भाजपा सरकार के कार्यकाल के ढाई वर्ष पूरे होने के साथ ही राजनीतिक गलियारों में गतिविधियां तेज हो गई हैं। कई वरिष्ठ नेता और पार्टी पदाधिकारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए सक्रिय रूप से प्रयास करते नजर आ रहे हैं।
नई नियुक्तियों के बाद बढ़ी उम्मीद
राज्य सरकार इससे पहले विभिन्न बोर्डों और आयोगों में कई नियुक्तियां कर चुकी है। अगस्त 2025 में राज्य वित्त आयोग में अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के बाद नियुक्तियों की प्रक्रिया लगभग ठहर गई थी।
अब हाल ही में RPSC Members Appointment के तहत प्रो. संतोष आनंद और डॉ. दीपक कुमार शर्मा को सदस्य बनाया गया है। वहीं, Rajasthan Board of Secondary Education में हनुमान सिंह राठौड़ को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इन नई नियुक्तियों के साथ राज्य सरकार द्वारा की गई कुल राजनीतिक एवं संवैधानिक नियुक्तियों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
ढाई साल बाद क्यों बढ़ती हैं राजनीतिक नियुक्तियां?
राजस्थान की राजनीति में यह एक स्थापित परंपरा रही है कि किसी भी सरकार द्वारा बड़े पैमाने पर Political Appointments आमतौर पर कार्यकाल के मध्य चरण यानी लगभग ढाई साल पूरे होने के बाद शुरू की जाती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकारें शुरुआती वर्षों में प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर ध्यान देती हैं, जबकि मध्यावधि के बाद संगठन और राजनीतिक संतुलन साधने के लिए बोर्डों, आयोगों और निगमों में नियुक्तियां की जाती हैं।
कई महत्वपूर्ण आयोगों में पद अब भी खाली
राज्य में कई महत्वपूर्ण संस्थानों और आयोगों के शीर्ष पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं।
इनमें कुछ ऐसे आयोग भी शामिल हैं जहां नियुक्तियों में देरी को लेकर पूर्व में न्यायालयों को हस्तक्षेप करना पड़ा था। राजनीतिक नियुक्तियों का अगला चरण शुरू होने पर इन संस्थानों में भी नई जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।
इसके अलावा कुछ महत्वपूर्ण संस्थाएं ऐसी भी हैं जिनके अध्यक्षों को पूर्ववर्ती सरकार के दौरान कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया था, जिनमें शामिल हैं:
बीस सूत्री कार्यक्रम एवं समन्वय समिति
राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड
राजस्थान स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बोर्ड
पिछली सरकार में हुई थीं 100 से ज्यादा नियुक्तियां
पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में बोर्ड, आयोग, निगम और अकादमियों में 100 से अधिक राजनीतिक नियुक्तियां की गई थीं।
उस दौरान:
4 नेताओं को कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिला था।
31 से अधिक नेताओं को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा दिया गया था।
कई नियुक्तियां विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुई थीं, जिसके कारण कुछ नियुक्त व्यक्ति चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले कार्यभार भी नहीं संभाल सके थे।
अब तक किन संस्थाओं में हो चुकी हैं नियुक्तियां?
राज्य सरकार अब तक निम्न संस्थाओं में नियुक्तियां कर चुकी है। राजस्थान धरोहर संरक्षण प्राधिकरण, किसान आयोग, राज्य जीव-जन्तु कल्याण बोर्ड, सैनिक कल्याण सलाहकार समिति, अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास आयोग , देवनारायण बोर्ड , श्रीयादे माटी कला, बोर्ड -विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड, राज्य वित्त आयोग, आरपीएससी -राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, हालिया नियुक्तियों को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं।
Indian National Congress ने आरोप लगाया है कि हाल में हुई कुछ नियुक्तियों में विचारधारा आधारित चयन को प्राथमिकता दी गई है। पार्टी का कहना है कि महत्वपूर्ण संस्थानों में नियुक्तियों को पूरी तरह निष्पक्ष और योग्यता आधारित होना चाहिए। हालांकि सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में राजस्थान में बोर्डों, आयोगों और विभिन्न सरकारी संस्थानों में बड़े स्तर पर नियुक्तियों का दौर देखने को मिल सकता है। भाजपा सरकार के लिए यह संगठनात्मक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक नियुक्तियों की अगली सूची पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे प्रदेश की सियासत में नए शक्ति समीकरण उभर सकते हैं।

