नई दिल्ली. दुनियाभर के बाजार में Raw Sugar Prices में अगस्त 2026 के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली। इंटरनेशनल शुगर ऑर्गनाइजेशन (ISO) की 7 सितंबर को जारी अगस्त Market Report के मुताबिक, अक्टूबर डिलीवरी वाले कच्ची चीनी के वायदा भाव महीने की शुरुआत में करीब 15 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड थे, जो 31 अगस्त तक बढ़कर 17.8 सेंट प्रति पाउंड पहुंच गए। सितंबर की शुरुआत में भाव 18 सेंट प्रति पाउंड के पार भी चले गए।
अगस्त में 13 फीसदी बढ़ी कच्ची चीनी की कीमत
ISO के मुताबिक, अगस्त में ISA Daily Raw Sugar Price का औसत भाव 17.4 सेंट प्रति पाउंड रहा। जुलाई की तुलना में इसमें करीब 2 सेंट यानी 13 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। वहीं, सफेद चीनी की कीमतों में भी तेजी रही। अगस्त में ISO White Sugar Index औसतन 513 डॉलर प्रति टन रहा, जो जुलाई के मुकाबले करीब 47 डॉलर यानी 10 फीसदी अधिक है। इसी अवधि में व्हाइट शुगर प्रीमियम भी 127 डॉलर से बढ़कर 130 डॉलर प्रति टन हो गया।
भारत के Sugar Import फैसले का भी पड़ा असर
चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे भारत से जुड़ा फैसला भी एक महत्वपूर्ण कारण रहा। ISO के अनुसार, भारत सरकार ने घरेलू खपत के लिए चीनी आयात की अनुमति दी है। वर्ष 2016 के बाद पहली बार इस तरह का कदम उठाया गया है। सरकार ने ऑफ-क्रॉप अवधि के लिए अधिकतम 10 लाख टन चीनी आयात की अनुमति दी है, हालांकि वास्तविक आयात करीब 5 लाख टन रहने का अनुमान है।
इसका बड़ा हिस्सा तटीय इलाकों में मौजूद standalone refineries के जरिए आने की संभावना है, जहां imported raw sugar का इस्तेमाल किया जाता है। इससे वैश्विक बाजार में उपलब्ध White Sugar Supply पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
यूरोप में चीनी उत्पादन का अनुमान घटा
यूरोपीय बाजार से आई खबरों ने भी चीनी की कीमतों को मजबूती दी। यूरोपीय आयोग ने अगस्त में EU-27 Sugar and Ethanol Production का अनुमान घटाकर 13.4 मिलियन टन कर दिया। जून में यह अनुमान 14.1 मिलियन टन था। 2025/26 के उत्पादन के मुकाबले भी यह करीब 3.2 मिलियन टन कम है।
उत्पादन में संभावित गिरावट के पीछे यूरोप में पड़ा अत्यधिक गर्मी और सूखे का असर बताया गया है। इसके अलावा चीनी चुकंदर की खेती का क्षेत्रफल भी करीब 8 फीसदी घटा है। इससे आने वाले सीजन में यूरोपीय बाजार से चीनी की आपूर्ति कम रहने की आशंका बढ़ी है।
मौसम की चिंता से बढ़ी Speculative Fund Buying
ISO के अनुसार, अगस्त में चीनी की कीमतों में तेजी का सबसे बड़ा कारण Speculative Fund Buying रहा। जुलाई के अंत में फंड लगभग 1.20 लाख लॉट की net short position में थे, लेकिन 1 सितंबर तक उनकी स्थिति बदलकर 1.32 लाख से अधिक लॉट की net long position में पहुंच गई।
यह बदलाव करीब 12.7 मिलियन टन चीनी के बराबर माना जा रहा है। फंडों की इस आक्रामक खरीदारी के पीछे मौसम से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण हैं। खासकर मजबूत होते El Niño Pattern से दुनिया के कुछ प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
EU, Thailand और Central America में उत्पादन घटने का अनुमान
ISO के Quarterly Market Outlook में अनुमान लगाया गया है कि 2026/27 सीजन में यूरोपीय संघ, थाईलैंड और मध्य अमेरिका का संयुक्त चीनी उत्पादन 4 मिलियन टन से अधिक घट सकता है। हालांकि, ब्राजील की चीनी मिलें अगर गन्ने को अधिक मात्रा में चीनी उत्पादन की ओर मोड़ती हैं तो इस कमी का बड़ा हिस्सा पूरा किया जा सकता है।
ISO के शुरुआती अनुमान के मुताबिक 2026/27 में वैश्विक Sugar Market में करीब 0.2 मिलियन टन का छोटा deficit रह सकता है। वहीं, 2025/26 के लिए पहले अनुमानित 2.2 मिलियन टन के surplus को घटाकर 1.1 मिलियन टन कर दिया गया है। इसके पीछे ब्राजील में उम्मीद से कम उत्पादन को प्रमुख कारण माना गया है।
अलग-अलग एजेंसियों के अनुमान में भी बदलाव
अन्य बाजार विश्लेषकों ने भी चीनी के वैश्विक संतुलन को लेकर अपने अनुमान बदले हैं। Covrig Analytics ने 2026/27 के लिए पहले surplus का अनुमान लगाया था, लेकिन अब 3 लाख टन के deficit का अनुमान जताया है। वहीं Green Pool ने अपने deficit अनुमान को 3.34 मिलियन टन से घटाकर 3.24 मिलियन टन कर दिया है।
कीमतों में आगे भी रह सकती है तेजी, लेकिन गिरावट का खतरा
ISO ने हालांकि बाजार की मौजूदा तेजी को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्राजील के पास अभी भी बड़ी मात्रा में exportable sugar मौजूद है, जबकि वैश्विक import demand फिलहाल बहुत मजबूत नहीं है। ऐसे में मौजूदा कीमतें बाजार के वास्तविक Supply-Demand Fundamentals से कुछ हद तक अलग दिखाई दे रही हैं।
इस वजह से निकट अवधि में चीनी बाजार में Sell-off का खतरा बना हुआ है। हालांकि, मौसम से जुड़ी नई चिंताओं और आगे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका के कारण futures prices में अभी भी risk premium शामिल है। यानी आने वाले समय में मौसम, भारत के आयात, ब्राजील के उत्पादन और वैश्विक मांग जैसे कारक चीनी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

