नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने 8 अप्रैल 2026 को रेपो रेट को 5.25% पर यथावत रखने का फैसला किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई 6 सदस्यीय समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपनी ‘न्यूट्रल’ पॉलिसी स्टांस को भी जारी रखा है।
RBI का यह फैसला ऐसे समय आया है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया युद्ध, और सप्लाई चेन में बाधाएं महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों के लिए जोखिम पैदा कर रही हैं।
RBI MPC Meeting 2026: क्या रहा सबसे बड़ा फैसला?
RBI ने इस बार दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन साथ ही FY27 के लिए GDP ग्रोथ और महंगाई के अनुमान दोनों बढ़ा दिए।
मुख्य फैसले एक नजर में
रेपो रेट: 5.25% पर बरकरार
पॉलिसी स्टांस: ‘Neutral’ कायम
FY27 GDP अनुमान: 6.7% से बढ़ाकर 6.9%
FY27 खुदरा महंगाई (CPI) अनुमान: 4.2% से बढ़ाकर 4.6%
विदेशी मुद्रा भंडार: 697 अरब डॉलर
Gross FDI Growth: 20%
Merchandise Export: 0.2% घटा
Imports: 22% बढ़े
RBI गवर्नर ने क्यों कहा- ‘Wait and Watch’ जरूरी?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन बाहरी जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने माना कि:
ऊर्जा कीमतों में उछाल महंगाई बढ़ा सकता है
सप्लाई शॉक आगे चलकर डिमांड शॉक में बदल सकता है
सुपर एल नीनो जैसे मौसमीय कारक खाद्य महंगाई को प्रभावित कर सकते हैं
वैश्विक व्यापार में सुस्ती भारत के निर्यात पर असर डाल सकती है
गवर्नर ने कहा कि अभी के हालात में सतर्क रहना और जल्दबाजी से बचना ज्यादा जरूरी है।
FY27 GDP Forecast: RBI ने विकास दर का अनुमान क्यों बढ़ाया?
RBI ने FY27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि घरेलू मांग और सेवाक्षेत्र की मजबूती आगे भी अर्थव्यवस्था को सहारा देती रहेगी।
तिमाहीवार GDP अनुमान
Q1 FY27: 6.8%
Q2 FY27: 6.7%
Q3 FY27: 7.0%
Q4 FY27: 7.2%
ग्रोथ को सपोर्ट करने वाले फैक्टर
प्राइवेट कंजम्प्शन में मजबूती
सर्विस सेक्टर की निरंतर रफ्तार
GST rationalisation का असर
बैंकों और कॉरपोरेट्स की हेल्दी बैलेंस शीट
सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस
क्रेडिट डिमांड में सुधार
Inflation Outlook: RBI ने महंगाई का अनुमान क्यों बढ़ाया?
RBI ने FY27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान 4.2% से बढ़ाकर 4.6% कर दिया है। हालांकि फरवरी 2026 में CPI महंगाई 3.21% रही, जो RBI के 4% लक्ष्य के करीब है, लेकिन आगे के लिए जोखिम बढ़ गए हैं।
तिमाहीवार CPI अनुमान
Q2 FY27: 4.4%
Q3 FY27: 5.2%
Q4 FY27: 4.7%
महंगाई बढ़ने की बड़ी वजहें
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें
पश्चिम एशिया संकट
सप्लाई चेन बाधाएं
मौसम संबंधी अनिश्चितता
इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी
RBI ने साफ कहा कि Headline inflation फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन upside risks बढ़ गए हैं।
RBI की नई Inflation Target Policy क्या है?
यह मौद्रिक नीति समीक्षा उस घोषणा के बाद पहली है, जिसमें केंद्र सरकार ने RBI के लिए महंगाई लक्ष्य को अगले 5 साल के लिए फिर से तय किया है।
नई Inflation Targeting व्यवस्था
लक्ष्य: 4%
Tolerance Band: 2% ऊपर-नीचे
यानी 2% से 6% के बीच महंगाई स्वीकार्य
यह ढांचा मार्च 2031 तक लागू रहेगा
इसका मतलब है कि RBI आने वाले वर्षों में भी महंगाई नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम करेगा।
बैंकिंग, NBFC और लिक्विडिटी पर RBI ने क्या कहा?
RBI गवर्नर ने बैंकिंग सिस्टम को लेकर भरोसा जताया और कहा कि वित्तीय क्षेत्र की सेहत फिलहाल मजबूत बनी हुई है।
मुख्य बातें
बैंक क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी हुई है
NBFC सेक्टर के सिस्टम लेवल पैरामीटर स्वस्थ हैं
CAR, Asset Quality और Profitability संतोषजनक है
RBI ने कहा कि वह Liquidity Management में आगे भी सक्रिय और प्री-एम्प्टिव रहेगा
LAF के तहत सिस्टम लिक्विडिटी औसतन ₹2.30 लाख करोड़ के सरप्लस में रही
रुपया, फॉरेक्स रिजर्व और विदेशी निवेश पर RBI का बड़ा अपडेट
RBI ने कहा कि भारत का बाहरी क्षेत्र फिलहाल स्थिर है, हालांकि कुछ दबाव जरूर बने हुए हैं।
मुख्य अपडेट
Forex Reserves: 697 अरब डॉलर
Gross FDI: 20% की वृद्धि
ECB और NRI Deposits के फ्लो में नरमी
रुपया पिछले साल औसत से ज्यादा कमजोर हुआ
RBI ने कहा कि उसका लक्ष्य रुपये के किसी तय स्तर को बचाना नहीं, बल्कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है
Export-Import डेटा ने क्या संकेत दिए?
RBI ने वैश्विक व्यापार की सुस्ती का जिक्र करते हुए भारत के व्यापार मोर्चे पर भी कुछ मिश्रित संकेत दिए।
ट्रेड से जुड़े प्रमुख आंकड़े
Merchandise Exports: 0.2% की गिरावट
Merchandise Imports: 22% की बढ़ोतरी
Services Exports: आगे भी मजबूत रहने की उम्मीद
FTAs से निर्यात को कुछ राहत मिल सकती है
यह संकेत देता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में घरेलू मांग फिलहाल बड़ा सहारा बनी हुई है।
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए RBI का फैसला क्यों अहम है?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से होम लोन EMI पर तत्काल दबाव नहीं बढ़ेगा। इसका फायदा खासकर घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों और रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा।
क्या होगा असर?
होम लोन ब्याज दरों में फिलहाल स्थिरता
घर खरीदने वालों के लिए affordability बनी रहेगी
डेवलपर्स को प्रोजेक्ट प्लानिंग में आसानी
निवेशकों का भरोसा बना रहेगा
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI का यह कदम सेक्टर में डिमांड मोमेंटम बनाए रखने में मदद करेगा।
आम आदमी पर RBI के फैसले का क्या असर होगा?
RBI के इस फैसले का सीधा असर आम लोगों की जेब और EMI पर पड़ सकता है।
आपके लिए इसका मतलब
होम लोन EMI में अभी बदलाव की संभावना कम
कार/पर्सनल लोन की दरें फिलहाल स्थिर रह सकती हैं
महंगाई पर आगे दबाव बढ़ सकता है
FD निवेशकों के लिए बैंक दरों में फिलहाल बड़ा बदलाव नहीं
अगर तेल कीमतें और बढ़ीं, तो आने वाले महीनों में असर दिख सकता है
RBI ने इस बार साफ संदेश दिया है कि वह अर्थव्यवस्था को सपोर्ट भी करना चाहता है और महंगाई पर नजर भी बनाए रखना चाहता है। रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखकर RBI ने संकेत दिया है कि फिलहाल जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा।
हालांकि GDP अनुमान बढ़ाना यह दिखाता है कि केंद्रीय बैंक को भारत की विकास क्षमता पर भरोसा है, लेकिन महंगाई अनुमान बढ़ाना यह भी बताता है कि आगे का रास्ता आसान नहीं होने वाला।
