नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कक्षा 6 के छात्रों को तीन-भाषा नीति से वही राहत देने का निर्देश दिया है, जो पहले से कक्षा 7, 8 और 9 के विद्यार्थियों को दी जा रही है। केंद्र सरकार ने कक्षा 6 के लिए इस छूट के पक्ष में नहीं होने की बात कही थी और अदालत को बताया था कि करीब 99 प्रतिशत CBSE स्कूल नई भाषा नीति लागू करने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी राहत देने का निर्देश दिया।
CBSE की तीन-भाषा व्यवस्था क्या है?
CBSE के माध्यमिक विद्यालय पाठ्यक्रम के तहत भाषा विषयों को R1, R2 और R3 के तीन स्तरों में बांटा गया है। R1 छात्र की मुख्य भाषा होगी, जबकि R2 एक अलग भाषा होगी। R3 को तीसरी भाषा के रूप में रखा गया है। नई व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किया जाना है। यह व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुरू होकर वर्ष 2030-31 तक कक्षा 10 के स्तर पर पूरी तरह लागू किए जाने की योजना है।
नई व्यवस्था के अनुसार R1 और R2 के तौर पर चुनी गई भाषाएं एक जैसी नहीं हो सकतीं और इन्हें एक से अधिक स्तर पर एक साथ नहीं रखा जा सकता। CBSE के अनुसार भाषा विकल्पों में हिंदी और अंग्रेजी के साथ संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाएं तथा अन्य भारतीय क्षेत्रीय और विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।
दो भाषाएं भारतीय भाषाओं में से चुनना जरूरी
CBSE की तीन-भाषा नीति के तहत चुनी जाने वाली तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय भाषाएं (Bhartiya Bhashas) होनी चाहिए। तीसरी भाषा यानी R3 के रूप में गैर-मातृभाषा को चुना जा सकता है, लेकिन इसके लिए बाकी दो भाषाओं का भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
भारतीय भाषाओं में हिंदी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, मराठी, बंगाली, पंजाबी, गुजराती और ओड़िया सहित कई भाषाएं शामिल हैं। वहीं अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, अरबी और स्पेनिश जैसी भाषाओं को गैर-मातृभाषा विकल्पों में रखा गया है।
कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए अलग व्यवस्था
शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कक्षा 10 के छात्रों के लिए पुरानी दो-भाषा व्यवस्था जारी रहेगी। इस बैच के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा लेना अनिवार्य नहीं होगा।
वहीं कक्षा 9 के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से एक भारतीय भाषा होगी। इस कक्षा के लिए तीसरी भाषा R3 का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के जरिए किया जाएगा। जब यह बैच 2027-28 में कक्षा 10 में पहुंचेगा, तब R3 के लिए CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
कक्षा 6 को राहत मिलने का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद कक्षा 6 के छात्रों को भी संक्रमण अवधि के दौरान वही छूट मिलेगी, जो कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों के लिए उपलब्ध कराई गई है। इससे नई तीन-भाषा व्यवस्था लागू होने के दौरान कक्षा 6 के विद्यार्थियों को भी अतिरिक्त राहत मिल सकेगी।
केंद्र सरकार की ओर से अदालत में यह कहा गया था कि लगभग 99 प्रतिशत CBSE स्कूल तीन-भाषा नीति को लागू करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, अदालत ने कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी छूट देने का निर्देश दिया है। इससे CBSE की नई भाषा व्यवस्था को लेकर संक्रमण अवधि के प्रावधानों में कक्षा 6 भी शामिल हो जाएगी।
2030-31 तक पूरी तरह लागू होगी व्यवस्था
CBSE के निर्धारित ढांचे के अनुसार तीन-भाषा फॉर्मूले को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। R1, R2 और R3 के जरिए विद्यार्थियों को अलग-अलग भाषाएं पढ़ने का विकल्प दिया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कक्षा 6 से शुरू होकर 2030-31 तक कक्षा 10 में तीन-भाषा व्यवस्था को पूरी तरह लागू करना है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से कक्षा 6 को दी गई राहत इसी संक्रमण व्यवस्था का हिस्सा होगी।

