नई दिल्ली. भारत में थोक महंगाई (WPI Inflation) में आई तेज बढ़ोतरी अब खुदरा महंगाई (CPI Inflation) पर भी असर डाल सकती है। India Ratings and Research (Ind-Ra) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिसका असर आने वाले महीनों में आम उपभोक्ताओं पर दिखाई दे सकता है।
मई 2026 में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.8% रहने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 3.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जबकि अप्रैल में यह 3.5 प्रतिशत थी। वहीं थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अप्रैल के 8.3 प्रतिशत से बढ़कर मई में 9 प्रतिशत तक जा सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल इसका मुख्य कारण है।
डीजल महंगा होने से बढ़ेगा फ्रेट कॉस्ट
Ind-Ra की डायरेक्टर Megha Arora ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में WPI और CPI के बीच का अंतर कम हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर धीरे-धीरे खुदरा कीमतों तक पहुंचेगा, खासकर डीजल महंगा होने से माल ढुलाई (Freight) की लागत बढ़ेगी।
अप्रैल में 14 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई
भारत में खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 में बढ़कर 3.48 प्रतिशत हो गई, जो पिछले 14 महीनों का उच्च स्तर है। मार्च 2026 में यह 3.4 प्रतिशत थी। रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य वस्तुओं और सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों ने महंगाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
सब्जियां और LPG भी महंगे
रिपोर्ट में कहा गया कि सब्जियों की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसके अलावा कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगे होने से रेस्तरां सेवाओं की महंगाई अप्रैल में बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जो मार्च में 2.88 प्रतिशत थी।
थोक महंगाई में तेज उछाल
अप्रैल 2026 में WPI महंगाई दर 3.88 प्रतिशत से बढ़कर 8.3 प्रतिशत हो गई। इस दौरान ईंधन और बिजली श्रेणी की महंगाई 24.71 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार WPI में ईंधन की हिस्सेदारी अधिक होने और वैश्विक तेल कीमतों का असर देर से उपभोक्ताओं तक पहुंचने के कारण WPI और CPI के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।
पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर
भारत में 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।Ind-Ra का अनुमान है कि इससे खुदरा महंगाई में लगभग 15 बेसिस पॉइंट का अतिरिक्त असर पड़ सकता है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया कि इसका असर WPI पर नहीं पड़ेगा।
दूध महंगा होने से भी बढ़ेगा दबाव
Amul और Mother Dairy ने 14 मई को दूध की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। Ind-Ra के मुताबिक इससे खुदरा महंगाई में करीब 26 बेसिस पॉइंट तक की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि ईंधन कीमतों के मुकाबले दूध महंगा होने का असर ज्यादा लंबी अवधि तक बना रह सकता है और मई 2027 तक महंगाई को प्रभावित कर सकता है।
एल नीनो और कम बारिश से बढ़ सकती है चिंता
रिपोर्ट में मौसम और वैश्विक कमोडिटी कीमतों को भी बड़ा जोखिम बताया गया है। संभावित एल नीनो परिस्थितियों, धातुओं की बढ़ती वैश्विक कीमतों और आयातित कच्चे माल की महंगाई से मैन्युफैक्चरिंग लागत बढ़ सकती है।
गोल्ड इंपोर्ट में 24% की बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार FY26 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट 24.1 प्रतिशत बढ़कर 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अब कच्चे तेल और इलेक्ट्रॉनिक सामान के बाद सोना भारत का तीसरा सबसे बड़ा आयातित उत्पाद बन गया है। सरकार ने 13 मई को गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी।
RBI फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं कर सकता
बढ़ती महंगाई के बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि Reserve Bank of India (RBI) जून की मौद्रिक नीति बैठक में प्रमुख ब्याज दरों को फिलहाल स्थिर रख सकता है, क्योंकि खुदरा महंगाई अभी नियंत्रण में मानी जा रही है।
