नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक और बौद्ध धर्म का प्रमुख तीर्थस्थल सारनाथ (Sarnath) अब आधिकारिक तौर पर UNESCO World Heritage List में शामिल हो गया है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जताते हुए इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सारनाथ का भगवान बुद्ध से गहरा संबंध है और यहां से दिया गया उनका ज्ञान, करुणा और सद्भाव का संदेश आज भी पूरी दुनिया को प्रेरित करता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा कि UNESCO World Heritage का यह सम्मान भारत की समृद्ध सभ्यतागत और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक स्तर पर सम्मान है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मान्यता के बाद दुनिया भर से अधिक लोग सारनाथ आएंगे और भगवान बुद्ध के विचारों तथा उनके आदर्शों से जुड़ने का अवसर प्राप्त करेंगे।
भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली नई पहचान
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस उपलब्धि को भारत की सांस्कृतिक धरोहर के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि सारनाथ शांति, ज्ञान और करुणा का ऐसा प्रतीक है, जिसने सदियों से पूरी मानवता को प्रेरित किया है। उनके अनुसार यह सम्मान भारतीय सभ्यता के उन आध्यात्मिक और दार्शनिक मूल्यों की वैश्विक स्वीकृति है, जिन्होंने दुनिया को नई दिशा दी है।
पर्यटन और बौद्ध सर्किट को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि Sarnath UNESCO World Heritage Site का दर्जा मिलने से उत्तर प्रदेश में Tourism, Buddhist Circuit, Heritage Tourism और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना है, जिससे रोजगार और पर्यटन से जुड़े कारोबार को भी नई गति मिलेगी। सारनाथ को मिली यह अंतरराष्ट्रीय पहचान भारत की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपरा को वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूत करेगी।

