नई दिल्ली. देश में शिक्षा के अधिकार को लेकर एक अहम निर्णय देते हुए Supreme Court of India ने कहा है कि Right to Education (RTE) Act के तहत चयनित छात्रों को स्कूलों में प्रवेश देना अनिवार्य है। कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय मिशन बताते हुए स्पष्ट किया कि कोई भी स्कूल इसमें बाधा नहीं डाल सकता।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
जस्टिस P. S. Narasimha और Alok Aradhe की बेंच ने कहा:
पड़ोस के सभी स्कूल, चाहे प्राइवेट अनएडेड (Private Unaided) ही क्यों न हों,
उन्हें राज्य सरकार द्वारा चयनित छात्रों को बिना देरी प्रवेश देना होगा।
कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को प्रवेश से वंचित करना, संविधान के अनुच्छेद 21A के तहत उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
25% आरक्षण पर जोर
कोर्ट ने कहा कि RTE Act के तहत:
25% सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं
यह प्रावधान समाज में समानता और सामाजिक बदलाव लाने की क्षमता रखता है
कानून का सही और प्रभावी क्रियान्वयन बेहद जरूरी है
स्कूल की दलील खारिज
मामला Lucknow के एक निजी स्कूल से जुड़ा था, जिसने RTE के तहत चयनित एक छात्रा को प्रवेश देने से इनकार कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल की अपील खारिज कर दी
हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा
स्कूलों के लिए सख्त निर्देश
कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार द्वारा भेजी गई चयनित छात्रों की सूची को स्कूल चुनौती नहीं दे सकते। एक बार सूची मिलने के बाद प्रवेश देना ही होगा। किसी भी तरह की बाधा शिक्षा के अधिकार को खोखला बना देगी।
क्यों अहम है यह फैसला?
यह निर्णय देशभर में RTE कानून के पालन को और मजबूत करेगा। निजी स्कूलों की जवाबदेही तय करेगा
गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा का समान अवसर मिलेगा।
