नई दिल्ली. भारत को Global Semiconductor Industry में मजबूत स्थान दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने Semicon India Programme 2.0 (Semicon 2.0) को आधिकारिक रूप से Notify कर दिया है। इस नई योजना के तहत सरकार ने 1.27 लाख करोड़ रुपये का Outlay निर्धारित किया है। सरकार का लक्ष्य देश में Semiconductor Manufacturing और Chip Production के पूरे Ecosystem को विकसित करना है, ताकि भारत आने वाले वर्षों में Global Semiconductor Market का करीब 10 प्रतिशत हिस्सा हासिल कर सके।
केंद्रीय Electronics and Information Technology मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि Semicon 2.0 के जरिए भारत को Global Semiconductor Value Chain में और मजबूती से स्थापित करने पर सरकार का फोकस है। इसका उद्देश्य केवल Chip Manufacturing तक सीमित नहीं है, बल्कि Wafer Fabrication से लेकर Chip Production और Design तक पूरी Value Chain को देश में विकसित करना है।
सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के सभी छह स्तंभों की अधिसूचना जारी
सरकार ने Semicon India Programme 2.0 के सभी छह Pillars की Notification जारी कर दी है। इसके साथ ही Semiconductor Industry के लिए भारत में निवेश और उत्पादन का एक व्यापक ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सरकार का मानना है कि इस पहल से देश में Semiconductor Manufacturing Ecosystem मजबूत होगा और Global Companies के लिए भारत एक आकर्षक Investment Destination बनकर उभरेगा।
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, Global Semiconductor Industry से जुड़े Stakeholders के बीच यह भरोसा लगातार बढ़ रहा है कि आने वाले दशकों में बड़े Semiconductor Investments के लिए भारत एक उपयुक्त स्थान है। उन्होंने कहा कि Semicon 1.0 के दौरान Projects को Approval से Ground-Breaking और फिर Commercial Production तक पहुंचाने की गति को Industry ने विशेष रूप से नोट किया है।
सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में भारत की सबसे बड़ी भूमिका
सरकार का लक्ष्य भारत को Global Semiconductor Supply Chain का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है। इसके लिए देश में Semiconductor Manufacturing के साथ-साथ Semiconductor Design की क्षमता को भी बढ़ाया जा रहा है। सरकार का मानना है कि भारत की बड़ी Talent Pool, Policy Certainty और Ease of Working जैसी खूबियां Semiconductor Companies को देश में निवेश के लिए आकर्षित कर रही हैं।
मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में Global Industries को Semiconductor Production और Design के लिए भारत पर अधिक निर्भर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके जरिए भारत को केवल एक Manufacturing Base नहीं, बल्कि Global Semiconductor Ecosystem के एक अहम केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
वेफर से चिप उत्पादन तक तैयार होने से पूरा इकोसिस्टम तैयार हो जाएगा
Semicon 2.0 के तहत सरकार Semiconductor Value Chain के अलग-अलग हिस्सों को देश में विकसित करने पर जोर दे रही है। इसमें Wafer Fabrication, Chip Manufacturing, Semiconductor Design और अन्य जरूरी Infrastructure को मजबूत करना शामिल है। इसका उद्देश्य भारत में ऐसा Integrated Semiconductor Ecosystem तैयार करना है, जिससे कंपनियों को उत्पादन और डिजाइन के लिए आवश्यक सुविधाएं एक ही देश में उपलब्ध हो सकें।
सरकार के अनुसार, Semiconductor Industry को मजबूत बनाने के लिए केवल कुछ बड़ी Manufacturing Units स्थापित करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए पूरी Supply Chain, Skilled Workforce, Technology, Research और Supporting Industries का विकास भी जरूरी है।
अगले 50 वर्षों के लिए Semiconductor Industry की नींव
अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत में Semiconductor का पूरा Ecosystem विकसित करना देश के अगले 50 वर्षों में Semiconductor Industry की Sustainable Growth के लिए आधार तैयार करेगा। सरकार की कोशिश है कि भारत Semiconductor Manufacturing और Design के क्षेत्र में लंबी अवधि की क्षमता विकसित करे और Global Supply Chain में अपनी भूमिका लगातार बढ़ाए।
Semicon 2.0 के 1.27 लाख करोड़ रुपये के Outlay को इसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे देश में Semiconductor Investments बढ़ने, नई Manufacturing Facilities स्थापित होने, रोजगार के अवसर पैदा होने और Technology तथा Design Capabilities के विस्तार की उम्मीद है। सरकार का व्यापक लक्ष्य भारत को Global Semiconductor Industry में एक मजबूत और भरोसेमंद भागीदार के रूप में स्थापित करना है।

