नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने गुजरात दौरे के दूसरे दिन सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित भव्य ‘शौर्य यात्रा’ में हिस्सा लिया। यह यात्रा उन अनगिनत वीरों को श्रद्धांजलि देने के लिए निकाली गई, जिन्होंने सदियों पहले सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
108 घोड़ों की प्रतीकात्मक परेड
शौर्य यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक परेड शामिल रही, जो वीरता, बलिदान और राष्ट्र के आत्मसम्मान का प्रतीक मानी जा रही है। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंदिर की रक्षा में बलिदान देने वाले योद्धाओं को नमन किया और पुष्पांजलि अर्पित की।
सोमनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन
शौर्य यात्रा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने श्री सोमनाथ महादेव मंदिर में दर्शन, पूजा और आरती की। उन्होंने संतों, साधुओं और श्रद्धालुओं से मुलाकात की तथा मंदिर परिसर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लिया।
1000 साल के संघर्ष की गवाही: पीएम मोदी
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास विनाश का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है।
उन्होंने कहा कि जो शक्तियां सोमनाथ को मिटाने आई थीं, वे इतिहास के पन्नों में सिमट गईं, लेकिन आज भी सोमनाथ का धर्मध्वज पूरी शान से लहरा रहा है।
‘आस्था का मार्ग नफरत की ओर नहीं ले जाता’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता ने कभी विनाश की शिक्षा नहीं दी। हमारी आस्था का रास्ता नफरत की ओर नहीं जाता। भारत ने दुनिया को दूसरों को हराकर नहीं, बल्कि दिल जीतकर आगे बढ़ने का संदेश दिया है।
स्वाधीनता के बाद भी पुनर्निर्माण का विरोध हुआ
पीएम मोदी ने कहा कि आज़ादी के बाद भी कुछ ताकतों ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया, और ऐसी शक्तियां आज भी सक्रिय हैं। उन्होंने देशवासियों से एकजुट और सजग रहने का आह्वान किया।
सरदार पटेल के योगदान को किया नमन
शौर्य यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की और सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का महत्व
आयोजन अवधि: 8 से 11 जनवरी 2026
अवसर: महमूद गजनवी के आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे
1951 में मंदिर पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ
72 घंटे का अखंड ‘ॐ’ मंत्र जाप
देशभर से सैकड़ों संतों की सहभागिता
राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की सभ्यता, आस्था और आत्मसम्मान का प्रतीक बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने इस आयोजन
