नई दिल्ली. कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने NEET पेपर लीक विवाद और छात्रों के जारी आंदोलन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों और शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ सरकार ने संवाद करने के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपनाया। उनके अनुसार, सरकार ने देश के युवाओं को भविष्य के निर्माणकर्ता मानने के बजाय विरोधी की तरह व्यवहार किया।
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20 जुलाई की घटना को बताया लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण
सोनिया गांधी ने अपने लेख में 20 जुलाई को हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली में संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि घर लौट रहे छात्रों को भी नहीं छोड़ा गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं है।
सरकार संवाद के बजाय बल प्रयोग कर रही है
कांग्रेस नेता ने कहा कि छात्रों की मांग केवल परीक्षा में पारदर्शिता, जवाबदेही और शिक्षा सुधार की है, लेकिन सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई का सहारा लिया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में बातचीत सबसे पहला रास्ता होना चाहिए, जबकि मौजूदा हालात इसके विपरीत दिखाई दे रहे हैं।
शिक्षा बजट और सरकारी स्कूलों पर भी उठाए सवाल
सोनिया गांधी ने शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी निवेश को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल और उच्च शिक्षा के बजट में कटौती की गई है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं, जबकि निजी शिक्षा संस्थानों की संख्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि इससे छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ रहा है।
NTA की कार्यप्रणाली पर भी साधा निशाना
उन्होंने National Testing Agency (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह संस्था पर्याप्त संसाधनों और कर्मचारियों के बिना काम कर रही है। उनका दावा है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण छात्रों का भरोसा कमजोर हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
युवाओं की बेरोजगारी और बढ़ती चिंता का किया जिक्र
सोनिया गांधी ने कहा कि देश में युवाओं के बीच बेरोजगारी पहले से ही एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में परीक्षा से जुड़े विवाद और पेपर लीक जैसी घटनाएं छात्रों की चिंता और बढ़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र और उनके परिवार बेहतर भविष्य की उम्मीद में कठिन मेहनत करते हैं, इसलिए परीक्षा प्रणाली पूरी तरह निष्पक्ष और भरोसेमंद होनी चाहिए।
छात्रों से बातचीत करने की अपील
अपने लेख के अंत में सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह छात्रों पर कार्रवाई रोककर उनसे बातचीत करे और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए जवाबदेही और सुधार दोनों जरूरी हैं।

