नई दिल्ली. भारत में स्वदेशी ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में एक और अहम विकास सामने आया है। नोएडा स्थित रक्षा तकनीक कंपनी IG Defence ने राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में अपने KAL Long-Range One-Way Attack Drone का सफल फ्लाइट ट्रायल पूरा करने की जानकारी दी है। कंपनी के मुताबिक, यह परीक्षण उसके स्वदेशी मानवरहित स्ट्राइक सिस्टम के विकास में एक महत्वपूर्ण चरण है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षण के दौरान ड्रोन के airframe, propulsion, avionics, navigation और mission systems के एकीकृत संचालन को परखा गया।
1000 किलोमीटर तक की रेंज का दावा
IG Defence के अनुसार, KAL को लंबी दूरी की one-way attack drone श्रेणी के लिए डिजाइन किया गया है और इसकी अधिकतम रेंज 1000 किलोमीटर तक बताई गई है। कंपनी के मुताबिक, इसकी endurance 7 से 8 घंटे तक हो सकती है और यह अधिकतम 50 किलोग्राम तक payload ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।
कंपनी ने यह भी बताया है कि यह प्लेटफॉर्म समुद्र तल से करीब 5,000 मीटर तक की ऊंचाई पर संचालित होने के लिए तैयार किया गया है। हालांकि, पोखरण में किए गए हालिया परीक्षण में ड्रोन ने वास्तव में कितनी दूरी तय की या कितने समय तक उड़ान भरी, इसकी जानकारी कंपनी ने सार्वजनिक नहीं की है।
ऑटोनॉमस नेविगेशन सिस्टम से लैस है KAL
KAL में navigation के लिए Global Navigation Satellite System (GNSS) और Inertial Navigation System (INS) को जोड़ा गया है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य मिशन के दौरान autonomous flight को सपोर्ट करना है।
कंपनी का कहना है कि KAL को उसके प्रमुख systems को देश में ही विकसित करते हुए तैयार किया गया है। पोखरण परीक्षण को airframe से लेकर propulsion, avionics और navigation जैसी प्रणालियों के integrated architecture के validation से जोड़ा गया है।
वन-वे अटैक ड्रोन की बढ़ती भूमिका
हाल के वर्षों में long-range one-way attack drones आधुनिक युद्ध व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बने हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में Shahed-136 और Geran-2 जैसे systems के इस्तेमाल ने लंबी दूरी तक मानवरहित प्लेटफॉर्म के उपयोग को चर्चा में ला दिया है।
इसी पृष्ठभूमि में कई देश ऐसे स्वदेशी systems विकसित कर रहे हैं, जिनमें लंबी दूरी, autonomous operation और बड़े पैमाने पर production की क्षमता पर जोर दिया जाता है। IG Defence ने भी KAL को इसी उभरती तकनीकी श्रेणी में रखा है।
रणनीतिक लक्ष्यों के लिए डिजाइन
कंपनी के अनुसार, KAL को निर्धारित mission configuration के आधार पर अलग-अलग रणनीतिक लक्ष्यों के खिलाफ precision engagement के लिए डिजाइन किया गया है। इनमें infrastructure और कुछ सैन्य installations जैसी श्रेणियां शामिल हो सकती हैं। किसी भी वास्तविक operational deployment का स्वरूप संबंधित मंजूरियों और मिशन आवश्यकताओं पर निर्भर करेगा।
कंपनी का कहना है कि KAL उसके GRID Strike portfolio का हिस्सा है। इसे IG Defence के GRID Battle Management System के साथ integrate किया जा सकता है, जो unmanned platforms और battlefield information को coordinate करने के लिए तैयार किया गया है।
पोखरण में Dronathon के बीच परीक्षण
KAL का परीक्षण ऐसे समय में हुआ है, जब भारतीय वायुसेना ने भी पोखरण में अपना पहला Dronathon-2026 आयोजित किया था। 14 से 16 सितंबर तक हुए इस कार्यक्रम में भारतीय defence companies, startups, MSMEs और innovators ने unmanned तथा counter-unmanned technologies का प्रदर्शन किया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, Dronathon का उद्देश्य भारतीय unmanned systems industry के साथ सीधे जुड़ना और वास्तविक परिस्थितियों के करीब उनकी क्षमताओं का आकलन करना था।
T-SHUL BEAM ने भी दिखाया Counter-Drone Capability
इसी दौरान IG Defence के T-SHUL BEAM Counter-UAS System का भी प्रदर्शन किया गया। यह एक portable soft-kill counter-drone system है, जिसे hostile drones को electronic countermeasures के जरिए निष्क्रिय करने के लिए डिजाइन किया गया है।
कंपनी और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, T-SHUL BEAM का उद्देश्य ड्रोन के communication और navigation links में व्यवधान डालना है। यानी यह hard-kill प्रणाली की तरह सीधे ड्रोन को नष्ट करने के बजाय उसके electronic links को disrupt करने की तकनीक पर काम करता है।
भारत में स्वदेशी Drone और Counter-Drone Technology पर जोर
KAL और T-SHUL BEAM का विकास भारत में indigenous unmanned और counter-UAS technologies को आगे बढ़ाने की कोशिशों का हिस्सा है। हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र में ऐसे systems की जरूरत और इस्तेमाल पर वैश्विक स्तर पर चर्चा बढ़ी है।
IG Defence का कहना है कि KAL के जरिए उसका फोकस एक indigenous long-range unmanned strike platform तैयार करने पर है, जबकि T-SHUL BEAM जैसे systems का उद्देश्य drone threats के खिलाफ counter-UAS capability उपलब्ध कराना है।
परीक्षण के बाद आगे की राह
पोखरण में हुआ परीक्षण KAL के विकास के लिहाज से एक महत्वपूर्ण validation milestone माना जा रहा है। हालांकि, किसी भी रक्षा प्रणाली की वास्तविक operational capability का आकलन केवल एक परीक्षण के आधार पर नहीं किया जाता और आगे के परीक्षण, validation तथा संबंधित मंजूरियां भी महत्वपूर्ण होंगी।
फिलहाल KAL के सफल परीक्षण और T-SHUL BEAM के प्रदर्शन से भारत में स्वदेशी unmanned और counter-drone technology पर बढ़ते फोकस की तस्वीर सामने आती है। भारतीय वायुसेना का Dronathon-2026 भी इस क्षेत्र में घरेलू कंपनियों और नए तकनीकी समाधानों के परीक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच रहा है।

