नई दिल्ली. भारत सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और महंगाई पर काबू रखने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह प्रतिबंध 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक लागू रहेगा। सरकार ने बुधवार को जारी अधिसूचना में कहा कि यह फैसला घरेलू सप्लाई संबंधी चिंताओं को देखते हुए लिया गया है।
कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर रोक
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने जारी आदेश में स्पष्ट किया कि कच्ची, सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया गया है। सरकार ने चीनी निर्यात की नीति को “रिस्ट्रिक्टेड” से बदलकर “प्रोहिबिटेड” श्रेणी में डाल दिया है।
यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले सरकार ने बेहतर उत्पादन अनुमान के आधार पर सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी थी।
पहले से लोड हो चुके माल को मिलेगी छूट
सरकार ने कहा है कि जिन खेपों की लोडिंग 13 मई से पहले शुरू हो चुकी थी या जिन्हें आदेश लागू होने से पहले कस्टम विभाग को सौंप दिया गया था, उन्हें निर्यात की अनुमति दी जाएगी।
इसके अलावा भारत सरकार दूसरे देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए, संबंधित सरकारों के अनुरोध पर विशेष अनुमति देकर चीनी निर्यात की मंजूरी दे सकती है।
उत्पादन अनुमान घटने से बढ़ी चिंता
पिछले महीने इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने 30 सितंबर को समाप्त होने वाले सीजन के लिए देश का सकल चीनी उत्पादन अनुमान घटाकर 3.20 करोड़ टन कर दिया था। इससे पहले यह अनुमान 3.24 करोड़ टन रखा गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम बढ़ती महंगाई और मध्य-पूर्व संकट से पैदा हुई अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाजार को सुरक्षित रखने की रणनीति का हिस्सा है।
यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को राहत
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूरोपियन यूनियन और अमेरिका को मौजूदा टैरिफ-रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत होने वाले चीनी निर्यात पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
घरेलू मांग के मुकाबले घट सकता है स्टॉक
अनुमान है कि 2025-26 सीजन में भारत लगभग 275 लाख टन चीनी का उत्पादन करेगा। इसमें करीब 50 लाख टन शुरुआती स्टॉक जोड़ने पर कुल उपलब्धता 325 लाख टन के आसपास पहुंचेगी।
वहीं घरेलू मांग करीब 280 लाख टन रहने की संभावना है। ऐसे में सीजन खत्म होने तक केवल 45 लाख टन का स्टॉक बच सकता है। यह स्तर 2016-17 के बाद सबसे कम माना जा रहा है, जब क्लोजिंग स्टॉक करीब 39.4 लाख टन तक गिर गया था।
एल नीनो और खाद संकट ने बढ़ाई सरकार की चिंता
सरकार को अगले सीजन की फसल को लेकर भी चिंता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एल नीनो प्रभाव के कारण बारिश कमजोर पड़ सकती है, जिससे गन्ने की पैदावार प्रभावित होने का खतरा है। इसके अलावा मध्य-पूर्व संकट के चलते उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है।
चीनी मिलों और कारोबारियों को झटका
सरकार के इस अचानक फैसले से चीनी मिलों और निर्यात कारोबारियों को नुकसान हो सकता है। कई कंपनियां पहले ही निर्यात सौदे कर चुकी थीं, जिन पर अब अनिश्चितता का खतरा मंडरा रहा है।
वैश्विक बाजार में बढ़ीं चीनी की कीमतें
भारत के फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तुरंत देखने को मिला। न्यूयॉर्क में रॉ शुगर फ्यूचर्स में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जबकि लंदन में व्हाइट शुगर फ्यूचर्स करीब 3 प्रतिशत तक उछल गए।
भारत ब्राजील के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक और प्रमुख निर्यातक देश है। ऐसे में भारत द्वारा निर्यात रोकने से एशिया और अफ्रीका के कई देशों में चीनी की वैश्विक सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
