नई दिल्ली. जिला जजों की सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि देश के ज्यादातर हाईकोर्ट जिला जजों की Retirement Age बढ़ाकर 61 या 62 वर्ष करने के पक्ष में हैं। हालांकि, कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अभी इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं या उन्होंने इस संबंध में अपना अंतिम फैसला नहीं लिया है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन मामले की सुनवाई के दौरान यह जानकारी सुनी।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से दोबारा विचार करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने हाईकोर्ट से सलाह लेने के बाद जिला जजों की सेवानिवृत्ति आयु 61 या 62 वर्ष करने के प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया था। बुधवार की सुनवाई में अदालत ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा, जो अभी इस प्रस्ताव के पक्ष में नहीं हैं।
सरकारी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों की तुलना सही नहीं
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि सरकारी कर्मचारियों और न्यायिक अधिकारियों की सेवा परिस्थितियों को एक समान नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि न्यायिक सेवा में प्रवेश करने वाले लोगों की उम्र सामान्य सरकारी कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक होती है। ऐसे में दोनों के Retirement Age में दो साल का अंतर पूरी तरह उचित है।
न्यायिक सेवा में प्रवेश की उम्र अधिक होने का दिया तर्क
अदालत ने कहा कि एक सामान्य सरकारी कर्मचारी करीब 18 वर्ष की उम्र में सेवा में प्रवेश कर सकता है और लगभग 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त होता है। इसके विपरीत न्यायिक सेवा में प्रवेश करने वाला व्यक्ति आमतौर पर 27-28 वर्ष या उससे अधिक उम्र का होता है। सीधे अतिरिक्त जिला जज यानी ADJ के रूप में भर्ती के मामले में न्यूनतम उम्र करीब 35 वर्ष होती है। ऐसे में न्यायिक अधिकारियों को उनकी देर से शुरू होने वाली सेवा अवधि को देखते हुए अधिक Retirement Age का लाभ मिलना चाहिए।
Retirement Age बढ़ाने से आर्थिक बोझ का तर्क भी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने जिला जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के विरोध में दिए जा रहे Financial Burden के तर्क को भी ज्यादा महत्व नहीं दिया। अदालत ने कहा कि अगर जिला जजों को दो साल अतिरिक्त सेवा में रखा जाता है तो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तत्काल पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और अन्य Retirement Benefits का भुगतान टालने का अवसर मिलेगा। राजस्व की कमी से जूझ रहे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह आर्थिक रूप से फायदेमंद भी हो सकता है।
इन राज्यों ने Retirement Age बढ़ाने का किया विरोध
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल, मणिपुर, मेघालय, नगालैंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जिला जजों की Retirement Age बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ हैं। इन राज्यों ने फिलहाल 61 या 62 वर्ष तक सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने पर सहमति नहीं जताई है।
कई राज्य अभी कर रहे हैं प्रस्ताव पर विचार
असम, बिहार, गोवा, गुजरात, त्रिपुरा, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने अभी इस मामले पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है। इन राज्यों में प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। असम ने करीब 4.5 लाख सरकारी कर्मचारियों से जुड़े व्यापक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति पर विचार करने की बात कही है।
इन राज्यों ने बढ़ी Retirement Age को स्वीकार किया
तेलंगाना, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, सिक्किम और पुडुचेरी ने जिला जजों की सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने के प्रस्ताव पर सहमति जताई है। पुडुचेरी ने 61 वर्ष की उम्र तक बढ़ोतरी को लेकर मूल सहमति दी है और 62 वर्ष तक बढ़ाने पर आगे विचार करने की बात कही है।
CJI ने कहा- न्यायिक सेवा और सरकारी सेवा एक जैसी नहीं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायिक सेवा का इतिहास बताता है कि पहले भी न्यायिक अधिकारियों की Retirement Age सरकारी कर्मचारियों से अधिक रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु में समय के साथ बदलाव हुआ है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से न्यायिक अधिकारियों की सेवानिवृत्ति आयु अधिक रही है। CJI ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर पहले ही स्पष्ट रुख अपना चुका है और राज्यों की ओर से दिए जा रहे कई कारणों को कानूनी या तथ्यात्मक आधार नहीं मिलता।
जिला जजों की रिक्तियों का मुद्दा भी उठा
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता और Amicus Curiae सिद्धार्थ भटनागर ने दिसंबर 2025 में राज्यसभा में दिए गए एक जवाब का हवाला देते हुए बताया कि देशभर में जिला जजों के 1,744 पद खाली थे। उन्होंने यह भी बताया कि सेवानिवृत्त जिला जजों को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने और नई नियुक्तियों के बाद उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों से जुड़े मुद्दे भी सामने आ रहे हैं।
रिटायरमेंट के बाद दूसरी नियुक्तियों पर भी सुप्रीम कोर्ट की नजर
मुख्य न्यायाधीश ने सेवानिवृत्त जिला जजों द्वारा ट्रिब्यूनल जैसे अन्य संस्थानों में नियुक्तियां स्वीकार करने से जुड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि इस मामले में कोई व्यावहारिक समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा, ताकि न्यायिक व्यवस्था में अनुभवी अधिकारियों की भूमिका और सेवानिवृत्ति के बाद की नियुक्तियों से जुड़े पहलुओं को बेहतर तरीके से व्यवस्थित किया जा सके।
दो हफ्ते बाद फिर होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। अदालत को उम्मीद है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अभी तक जिला जजों की Retirement Age बढ़ाने के प्रस्ताव पर अंतिम फैसला नहीं लिया है, वे तब तक अपना रुख स्पष्ट कर देंगे। वहीं, अदालत ने विरोध करने वाले राज्यों से भी अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की अपेक्षा जताई है।

