नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को Supreme Court of India का न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इन नियुक्तियों की जानकारी साझा की। राष्ट्रपति ने गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश Justice Sunita Agarwal, दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Justice Devendra Kumar Upadhyaya और तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश Justice Aparesh Kumar Singh को सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया है।
इन नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कार्यरत संख्या 37 तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि अदालत की स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीशों की है। तीनों नामों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 28 सितंबर 2026 को की थी, जिसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्तियों को मंजूरी दी गई।
तीन नये उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश कौन हैं?
Justice Sunita Agarwal गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश थीं। उनका Parent High Court इलाहाबाद हाईकोर्ट है। वह नवंबर 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुई थीं और जुलाई 2023 में गुजरात हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश बनीं।
Justice Devendra Kumar Upadhyaya दिल्ली हाईकोर्ट के Chief Justice रहे हैं और उनका Parent High Court भी इलाहाबाद हाईकोर्ट है। उन्हें नवंबर 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाली।
वहीं Justice Aparesh Kumar Singh तेलंगाना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रहे हैं। उनका Parent High Court झारखंड हाईकोर्ट है। कॉलेजियम ने इन तीनों मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने की सिफारिश एक साथ की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट में भी मिला नया अतिरिक्त जज
राष्ट्रपति ने Gurvinder Pal Singh, Judicial Officer को दिल्ली हाईकोर्ट का Additional Judge नियुक्त किया है। यानी एक ओर जहां तीन हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में भेजा गया है, वहीं दिल्ली हाईकोर्ट में भी न्यायिक नियुक्ति की गई है।
इन नियुक्तियों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई के लिए न्यायिक क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। तीनों नए न्यायाधीशों के औपचारिक रूप से पदभार संभालने के बाद शीर्ष अदालत अपनी स्वीकृत 38 न्यायाधीशों की संख्या से केवल एक पद कम रहेगी।
