नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (13 जनवरी) को चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के दौरान नागरिकता (Citizenship) की जांच को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) से कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि क्या इस प्रक्रिया के तहत की गई जांच से केंद्र सरकार द्वारा डिपोर्टेशन (Deportation) जैसी कार्रवाई की राह खुल सकती है।
SIR पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (CJI Surya Kant) और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या Electoral Registration Officer (ERO) द्वारा की गई “inquisitorial enquiry” के आधार पर किसी व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटाया जा सकता है, जबकि केंद्र सरकार ने उसकी नागरिकता पर अंतिम फैसला न लिया हो।
6.5 करोड़ नाम हटने पर कोर्ट की चिंता
पीठ ने नोट किया कि SIR के दूसरे चरण में 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों—जिनमें पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं—में करीब 6.5 करोड़ नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटाए गए।
न्यायमूर्ति बागची ने पूछा,
“जब तक केंद्र सरकार किसी व्यक्ति की नागरिकता समाप्त करने का फैसला नहीं लेती, तब तक क्या उसका मतदान का अधिकार छीना जा सकता है?”
चुनाव आयोग का पक्ष: तुरंत फैसला जरूरी
चुनाव आयोग की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट राकेश द्विवेदी ने दलील दी कि ERO को “then and there” यानी उसी समय फैसला लेना होता है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह है, तो उसे वोटर लिस्ट में बने रहने देना चुनावी प्रक्रिया के लिए खतरा हो सकता है।
अपील का अधिकार सुरक्षित: EC
EC ने यह भी स्पष्ट किया कि SIR के तहत जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनके पास appeal का अधिकार है।
द्विवेदी ने कहा कि
“चुनावी प्रक्रिया को कुछ व्यक्तियों के कारण रोका नहीं जा सकता, लेकिन पर्याप्त safeguards मौजूद हैं।”
डिपोर्टेशन पर EC की सफाई
CJI के सवाल पर कि क्या गैर-नागरिकों को वोट का अधिकार नहीं है, EC ने जवाब दिया कि चुनाव आयोग केवल वोटर लिस्ट के लिए नागरिकता की जांच करता है डिपोर्टेशन या देश में रहने का फैसला केवल केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है EC के अनुसार, वोटर लिस्ट से नाम हटना अपने आप में डिपोर्टेशन का आदेश नहीं है।
NRC से तुलना पर EC का इनकार
पिछली सुनवाई (6 जनवरी) में चुनाव आयोग ने SIR को NRC (National Register of Citizens) से तुलना करने को “राजनीतिक rhetoric” बताया था।
EC ने कहा कि उसका संवैधानिक कर्तव्य है कि विदेशी मतदाता (Foreign Voters) वोटर लिस्ट में शामिल न हों।
SIR और NRC में क्या अंतर?
SIR: केवल 18 साल से ऊपर के नागरिकों के लिए NRC: सभी नागरिकों की गणना, चाहे उम्र या मानसिक स्थिति कुछ भी हो EC ने दलील दी कि उसे Article 324 के तहत वोटर लिस्ट तैयार करने और नागरिकता सत्यापन का अधिकार है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को करेगा। इस फैसले पर नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर सीधे मतदाता अधिकार और नागरिकता प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
