नई दिल्ली: सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने और आम लोगों पर उसके असर को कम करने के लिए वित्तीय और व्यापार नीति सहित कई प्रशासनिक कदम उठाए हैं।
लोकसभा में लिखित जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का महंगाई पर मध्यम अवधि में क्या असर पड़ेगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें विनिमय दर में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मांग और आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति का प्रभाव और घरेलू कीमतों पर इसका अप्रत्यक्ष असर शामिल है।
महंगाई दर में लगभग 30 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी
उन्होंने बताया कि पिछले एक साल से वैश्विक कच्चे तेल और भारतीय बास्केट की कीमतों में गिरावट का रुझान बना हुआ था। हालांकि पश्चिम एशिया में पिछले महीने की 28 तारीख से शुरू हुए भू-राजनीतिक तनाव के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला है।
वित्त मंत्री ने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें अनुमानित स्तर से 10 प्रतिशत अधिक रहती हैं और इसका पूरा असर घरेलू कीमतों पर पड़ता है, तो महंगाई दर में लगभग 30 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है।
सरकार का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों और वैश्विक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि जरूरत पड़ने पर महंगाई को काबू में रखने के लिए समय पर कदम उठाए जा सकें।
