नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फैसला लेने की समय-सीमा तय कर दी है। सोमवार को तीन जजों की पीठ ने निर्देश दिया कि दोनों पक्ष अगले चार सप्ताह के भीतर अपनी दलीलें, दस्तावेज, हलफनामे और जवाब दाखिल करें। इसके बाद भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को विवाद पर फैसला करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।
CJI सूर्यकांत की पीठ ने दिया निर्देश
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डीवाई नहीं बल्कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दिया। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत में ममता बनर्जी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें ECI के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है।
ECI ने मांगा था छह महीने का समय
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने मामले के निपटारे के लिए छह महीने का समय देने की मांग की। उन्होंने अदालत को बताया कि आयोग ने दोनों पक्षों को नोटिस जारी किए हैं और उनके जवाब का इंतजार किया जा रहा है।
हालांकि, अदालत ने दोनों पक्षों को चार सप्ताह में अपनी pleadings पूरी करने का निर्देश दिया और इसके बाद आयोग को तीन महीने में मामले पर फैसला लेने को कहा। सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि तीन महीने का समय पर्याप्त है।
दोनों गुटों के बीच नाम और चुनाव चिह्न को लेकर विवाद
यह विवाद TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर नियंत्रण के दावे से जुड़ा है। ECI ने 17 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। अंतिम फैसला होने तक दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं।
उपचुनाव से पहले बढ़ी मामले की अहमियत
ECI की यह अंतरिम व्यवस्था पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा उपचुनावों के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। आयोग ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को अलग नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न, जबकि दूसरे गुट को अलग नाम और लिफाफे का चुनाव चिह्न दिया है। नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनावों को देखते हुए विवाद पर जल्द फैसला लेने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने विवाद के गुण-दोष पर फैसला नहीं दिया
सुप्रीम कोर्ट का सोमवार का आदेश मुख्य रूप से प्रक्रिया और समय-सीमा से संबंधित है। अदालत ने यह तय नहीं किया है कि TMC के नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न पर किस गुट का अधिकार है। दोनों पक्षों को पहले अपने दस्तावेज और दलीलें चुनाव आयोग के सामने रखने होंगे, जिसके बाद ECI मामले पर अपना निर्णय देगा।
अब दोनों गुटों के पास अपनी pleadings पूरी करने के लिए चार सप्ताह का समय है। इसके बाद तीन महीने की अवधि में चुनाव आयोग को नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर फैसला करना होगा। इससे लंबे समय से चल रहे इस विवाद के निपटारे के लिए एक निर्धारित न्यायिक समय-सीमा सामने आ गई है।

