नई दिल्ली: संसद में करारी हार के बाद सरकार अब डीलिमिटेशन बिल को फिर से लाने और 2029 लोकसभा चुनाव से पहले ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ विधेयक को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार का गृह मंत्रालय इस दिशा में नए सिरे से मसौदा तैयार कर रहा है।
विपक्षी विरोध के बीच सरकार की नई रणनीति
पिछली बार संविधान संशोधन बिल (131वां संशोधन) संसद में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका था। इसके बाद अब सरकार इसे संशोधित रूप में दोबारा पेश करने की तैयारी कर रही है। वहीं, विपक्षी दलों का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील विधेयकों पर सभी पार्टियों से चर्चा और सहमति जरूरी है।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर भी तेजी
सरकार ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ को भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना पर काम कर रही है। इस प्रस्ताव को फिलहाल 39 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) देख रही है। समिति के अध्यक्ष के अनुसार, रिपोर्ट पर काम तेजी से चल रहा है और इसे समय पर पेश किया जाएगा।
सूत्रों का कहना है कि 2027 में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में इस योजना को चरणों में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
क्षेत्रीय दलों से संपर्क और राजनीतिक समीकरण
सूत्रों के अनुसार, बीजेपी कई क्षेत्रीय दलों से बातचीत कर रही है, जिनमें तमिलनाडु की डीएमके भी शामिल है। सरकार का मानना है कि कुछ मुद्दों पर सहमति बन सकती है, हालांकि डीएमके ने स्पष्ट किया है कि उसका रुख तमिलनाडु के हितों को ध्यान में रखकर तय होगा।
डीलिमिटेशन को लेकर विवाद जारी
डीलिमिटेशन को लेकर विपक्ष का कहना है कि इससे दक्षिणी राज्यों की संसदीय भागीदारी प्रभावित हो सकती है। वहीं सरकार का दावा है कि सभी राज्यों में समान वृद्धि के फॉर्मूले पर काम किया जा सकता है, ताकि किसी भी राज्य को नुकसान न हो।
कांग्रेस का रुख
कांग्रेस ने साफ कहा है कि पहले सभी दलों की बैठक होनी चाहिए और प्रस्ताव लिखित रूप में साझा किए जाने चाहिए। पार्टी का कहना है कि पहले की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है, इसलिए व्यापक चर्चा जरूरी है।
बंगाल और तमिलनाडु की राजनीति पर नजर
बीजेपी की नजर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति पर भी है। सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेद और नेतृत्व को लेकर असंतोष को सरकार संभावित राजनीतिक बदलाव के रूप में देख रही है।
