नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने ज्वेलरी निर्यातकों के लिए बड़ा फैसला लेते हुए एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत ड्यूटी-फ्री सोने के आयात पर सीमा तय कर दी है। अब इस योजना के तहत अधिकतम 100 किलोग्राम सोना ही आयात किया जा सकेगा। इस संबंध में Directorate General of Foreign Trade (DGFT) ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर नई व्यवस्था लागू करने की जानकारी दी।
क्या है नया नियम?
DGFT के अनुसार एडवांस ऑथराइजेशन के तहत सोने के आयात के लिए अब अधिकतम 100 किलोग्राम की सीमा तय कर दी गई है। पहले इस योजना के तहत सोने के आयात की कोई निर्धारित सीमा नहीं थी। ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स जरूरत के मुताबिक ड्यूटी-फ्री गोल्ड आयात कर सकते थे।
पहली बार आवेदन करने वालों की होगी फिजिकल जांच
नई गाइडलाइन के तहत पहली बार आवेदन करने वाले सभी आवेदकों की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का फिजिकल इंस्पेक्शन किया जाएगा। DGFT ने कहा कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवेदन करने वाली यूनिट वास्तव में संचालित हो रही है और उसकी उत्पादन क्षमता पर्याप्त है।
50 प्रतिशत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन पूरा करना जरूरी
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दूसरी बार एडवांस ऑथराइजेशन तभी जारी किया जाएगा, जब निर्यातक कम से कम 50 प्रतिशत एक्सपोर्ट ऑब्लिगेशन पूरा कर चुके हों। यानी निर्यातकों को पहले आयात किए गए सोने से तय निर्यात लक्ष्य का आधा हिस्सा पूरा करना अनिवार्य होगा।
DGFT को हर महीने भेजी जाएगी रिपोर्ट
नई व्यवस्था के तहत DGFT के क्षेत्रीय कार्यालयों को हर महीने एडवांस ऑथराइजेशन जारी करने से जुड़ी रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी। इस रिपोर्ट में जारी किए गए लाइसेंस और आयात से संबंधित पूरी जानकारी शामिल रहेगी।
क्या है एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम?
एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत निर्यातक कंपनियों को ऐसे कच्चे माल या इनपुट्स को बिना सीमा शुल्क (ड्यूटी-फ्री) आयात करने की अनुमति मिलती है, जिनका इस्तेमाल निर्यात उत्पाद तैयार करने में किया जाता है। ज्वेलरी उद्योग में इस योजना का व्यापक इस्तेमाल सोने और अन्य कीमती धातुओं के आयात के लिए किया जाता है।
सरकार क्यों हुई सख्त?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार ने सोने के आयात पर नियंत्रण और स्कीम के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। साथ ही इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम करने और आयात-निर्यात प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
