नई दिल्ली. भारत में Agriculture Sector को आधुनिक और Technology-driven बनाने की दिशा में सरकार की Digital Agriculture Mission तेजी से आगे बढ़ रही है। इस पहल के तहत अगस्त 2025 के मध्य तक देशभर में 7 करोड़ से अधिक Unique Farmer IDs तैयार की जा चुकी थीं। इन डिजिटल पहचान पत्रों को Kisan Pehchaan Patra के नाम से जाना जा रहा है और इन्हें किसानों के Land Records से जोड़ा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक करीब 11 करोड़ किसानों को इस Digital Farmer Registry से जोड़ना है।
Uttar Pradesh सबसे आगे, कई राज्यों में तेजी से बन रही Farmer ID
Digital Farmer ID बनाने के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। राज्य में करीब 1.4 करोड़ किसानों की डिजिटल पहचान तैयार की जा चुकी है। इसके बाद महाराष्ट्र में लगभग 1.1 करोड़, मध्य प्रदेश में 87 लाख, राजस्थान में 78 लाख और गुजरात में करीब 56 लाख Farmer IDs तैयार हुई हैं।
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में लगभग 45-45 लाख, जबकि तमिलनाडु और तेलंगाना में करीब 31-31 लाख किसानों को Digital Registry से जोड़ा गया है। छत्तीसगढ़ में करीब 25 लाख, केरल में 23 लाख, ओडिशा में 9 लाख, असम में 7 लाख और बिहार में करीब 5 लाख Farmer IDs तैयार की गई हैं। हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी इस व्यवस्था को जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी है।
Farmer ID में दर्ज होगी किसान की पूरी कृषि जानकारी
Kisan Pehchaan Patra केवल एक Digital Identity नहीं होगी, बल्कि इसमें किसान की Demographic Details, Land Holdings और Cropping Pattern जैसी अहम जानकारियां दर्ज होंगी। इस डेटा की मदद से सरकार और राज्य प्रशासन किसानों की जरूरत के मुताबिक Agricultural Schemes तैयार कर सकेंगे।
इससे Subsidy, Crop Insurance, Agricultural Credit और दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थी तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है। पुरानी Paper-Based व्यवस्था में रिकॉर्ड की गलतियों और जानकारी के बिखरे होने की समस्या सामने आती थी, जबकि Digital Registry इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास है।
AgriStack बनेगा Digital Agriculture का आधार
इस पूरी व्यवस्था के केंद्र में AgriStack है। सितंबर 2024 में शुरू किए गए इस Digital Agriculture Ecosystem के लिए 2,817 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। AgriStack के अंतर्गत Farmer Registry के साथ-साथ Geo-Referenced Village Maps और Crop Sown Registry जैसी Digital व्यवस्था विकसित की जा रही है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 30 राज्यों ने इन Digital Agriculture Tools को तैयार करने पर सहमति जताई है। इसके जरिए आगे चलकर Soil Fertility और Soil Profile Mapping को भी मजबूत किया जा सकता है। यानी किसान, जमीन, फसल और कृषि संबंधी जरूरी जानकारी को एक व्यापक Digital Ecosystem में जोड़ने की दिशा में काम हो रहा है।
Crop Survey से पकड़ी जा सकेगी गलत जानकारी
Digital Crop Survey यानी DCS इस व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए यह जांचने में मदद मिलेगी कि किसान ने वास्तव में वही फसल उगाई है या नहीं, जिसका उल्लेख उसने Agricultural Loan अथवा Crop Insurance के लिए किया है।
इस व्यवस्था से Kisan Credit Card (KCC) और Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY) जैसी योजनाओं में गलत दावों और संभावित Fraud को रोकने में सहायता मिल सकती है। साथ ही Direct Benefit Transfer के जरिए मिलने वाली सहायता को सही किसान तक पहुंचाना भी आसान हो सकता है।
सिर्फ जमीन मालिक नहीं, Tenant Farmers भी हो सकते हैं शामिल
Digital Farmer Registry की एक खास बात यह है कि इसमें केवल जमीन के मालिक किसानों तक सीमित रहने के बजाय Tenant Farmers और Lessee Farmers को भी शामिल करने का प्रावधान रखा गया है। हालांकि, इसका implementation संबंधित राज्य की policy पर निर्भर करेगा।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में बड़ी संख्या में खेती ऐसे किसानों द्वारा की जाती है, जिनके नाम पर जमीन का Ownership Record नहीं होता। सरकारी अनुमानों के अनुसार, देश के Gross Cropped Area का करीब 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ऐसे किसानों द्वारा खेती किया जाता है जो स्वयं जमीन के मालिक नहीं हैं।
Data Accuracy और Privacy बनी बड़ी चुनौती
Digital Agriculture Mission के सामने कई चुनौतियां भी हैं। Farmer Registry में दर्ज जानकारी की Accuracy बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है। किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव होने पर Digital Database को भी समय-समय पर Update करना जरूरी होगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारियों ने राज्यों से Farmer Registries को Updated Land Rights Records के साथ लगातार Link रखने पर जोर दिया है। इसके अलावा Data Privacy, Data Security और State-level Implementation भी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर लंबे समय तक ध्यान देना होगा।
Aadhaar और Digital Farmer ID का कनेक्शन भी अहम
किसानों के लिए Digital Identity व्यवस्था को मजबूत करने में Aadhaar की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। देश में Bank Account, Government Schemes, Insurance और कई अन्य सेवाओं के लिए Aadhaar का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में Farmer ID और Aadhaar आधारित सेवाओं के बीच बेहतर Digital Integration से किसानों तक सरकारी Benefits पहुंचाने की प्रक्रिया और आसान हो सकती है।
हालांकि, Aadhaar में Personal Details Update करने के नियम अलग हैं। Name, Date of Birth, Address और Biometric Information को Update करने के लिए अलग-अलग प्रक्रियाएं और सीमाएं निर्धारित हैं। वहीं Photograph और Fingerprint जैसे Biometric Updates के लिए Aadhaar Enrolment Centre पर जाना पड़ता है।
Tenant Farmers को जोड़ना होगा बड़ा टेस्ट
Digital Agriculture Mission का असली प्रभाव तभी दिखाई देगा जब Landless Cultivators, Tenant Farmers और Lessee Farmers को भी पर्याप्त रूप से Digital Ecosystem का हिस्सा बनाया जा सके। कई राज्यों में जमीन के मालिक और वास्तविक खेती करने वाले व्यक्ति अलग-अलग होते हैं। ऐसे मामलों में केवल Land Records के आधार पर Farmer Benefits तय करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
राज्यों की अलग-अलग Policies और Ground-level Implementation भी इस मिशन की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा Digital Records में किसी भी तरह की गलती सीधे Subsidy, Crop Insurance या Credit Benefits पर असर डाल सकती है।
11 करोड़ किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
7 करोड़ से अधिक Farmer IDs तैयार होने के बाद सरकार अब इस Digital Agriculture Network को और विस्तार देने की तैयारी में है। वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक करीब 11 करोड़ किसानों को Digital Farmer Registry से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
अगर यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो Digital Agriculture, AgriStack, Farmer ID, Crop Survey और Land Records को एक साथ जोड़कर भारत के Rural Economy और Agricultural Governance में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल किसानों का Digital Record तैयार करना नहीं, बल्कि Technology के माध्यम से सरकारी योजनाओं, कृषि ऋण, बीमा और Subsidies को ज्यादा Targeted और Transparent बनाना है।
भारत में खेती का भविष्य अब तेजी से Digital Technology से जुड़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह देखना अहम होगा कि Digital Farmer ID और AgriStack जैसी पहलें छोटे किसानों, महिला किसानों और Tenant Farmers तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचती हैं और क्या यह Digital Revolution वा
