नई दिल्ली. भारत में बढ़ती गर्मी, नमी और संभावित एल नीनो (El Niño) का खतरा अब केवल मौसम संबंधी चिंता नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की कृषि अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और निर्यात क्षेत्र के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के हालिया अनुमान ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण, जलवायु-अनुकूल कृषि और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत को खाद्य महंगाई, उत्पादन संकट और ग्रामीण आय में गिरावट जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बढ़ती गर्मी और एल नीनो का खतरा: भारतीय कृषि के सामने नई चुनौती
सामान्य से कम बारिश का अनुमान
29 मई को भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जून से सितंबर के मानसून सीजन के लिए दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 90 प्रतिशत वर्षा होने का अनुमान जारी किया। यह सामान्य से कम मानसून का संकेत है।
IMD के महानिदेशक Mrutyunjay Mohapatra ने बताया कि वर्तमान में न्यूट्रल ENSO स्थितियां तेजी से एल नीनो की ओर बढ़ रही हैं। जुलाई और अगस्त में एल नीनो की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक हो सकती है।
इतिहास बताता है कि एल नीनो वाले वर्षों में भारत में मानसून कमजोर पड़ता है, जिससे कृषि उत्पादन घटता है और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आती है।
क्यों खतरनाक है एल नीनो?
एल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है, जिसका असर दुनिया भर के मौसम चक्र पर पड़ता है।
भारत में एल नीनो के दौरान:
मानसून कमजोर हो सकता है
सूखे की स्थिति बन सकती है
सिंचाई के लिए जल उपलब्धता घट सकती है
फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है
खाद्य महंगाई बढ़ सकती है
ग्रामीण रोजगार पर असर पड़ सकता है, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए एल नीनो केवल मौसमीय घटना नहीं बल्कि आर्थिक जोखिम भी है।
आम उद्योग पर गर्मी की मार
जलवायु परिवर्तन का असर महाराष्ट्र के प्रसिद्ध अल्फांसो आम उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। महाराष्ट्र के देवगढ़ और कोंकण क्षेत्र में अत्यधिक गर्मी और अनियमित मौसम के कारण आम की पैदावार बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई बागान मालिकों को 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान झेलना पड़ा। इसका सीधा असर निर्यात पर भी पड़ा है।
विदेशों में आम की आपूर्ति घटी
निर्यातकों की लागत बढ़ी
माल ढुलाई खर्च में वृद्धि हुई
किसानों की आय में कमी आई
विशेषज्ञों के अनुसार यह संकेत है कि जलवायु परिवर्तन अब सीधे कृषि निर्यात को भी प्रभावित करने लगा है।
एक अरब लोगों की आजीविका पर खतरा
संयुक्त राष्ट्र की Food and Agriculture Organization और World Meteorological Organization की संयुक्त रिपोर्ट Extreme Heat and Agriculture के अनुसार बढ़ती गर्मी और नमी वैश्विक स्तर पर एक अरब से अधिक लोगों की आजीविका और स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि
हर साल लगभग 470 अरब कार्य घंटे गर्मी के कारण नष्ट हो रहे हैं
दक्षिण एशिया के कई क्षेत्रों में कृषि कार्य लंबे समय तक असुरक्षित हो सकते हैं
किसानों और खेत मजदूरों पर स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं
जल संकट और खाद्य महंगाई का खतरा
पर्यावरणविद् B. N. Kumar का कहना है कि जलवायु अस्थिरता अब भारत की कृषि और खाद्य व्यवस्था के लिए बड़ा आर्थिक खतरा बन रही है।
उनके अनुसार
बांधों में जल स्तर घट रहा है
सिंचाई का संकट बढ़ सकता है
बारिश कम होने से कृषि लागत बढ़ेगी
खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होगा
भविष्य में खाद्य महंगाई तेज हो सकती है
कुमार का मानना है कि जलाशयों की सफाई, भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन और ग्रामीण जल संरक्षण प्रणाली को मजबूत करना अब तत्काल आवश्यकता है।
कंक्रीट के जंगल बढ़ा रहे हैं संकट
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् Dharmesh Barai का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरीकरण ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। उनके मुताबिक पेड़, कुएं, तालाब और प्राकृतिक जल स्रोत धरती को ठंडा रखने और भूजल स्तर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लेकिन तेजी से बढ़ते कंक्रीटीकरण के कारण:
जमीन की नमी कम हो रही है
हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ रहा है
तापमान और आर्द्रता दोनों बढ़ रहे हैं
भूजल तेजी से नीचे जा रहा है
वे चेतावनी देते हैं कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में जीवन और कृषि दोनों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।
जलीय जीव भी प्रभावित
जलवायु परिवर्तन का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
तालाबों और झीलों का पानी तेजी से गर्म हो रहा है
ऑक्सीजन स्तर कम हो रहा है
मछलियों और अन्य जलीय जीवों की मृत्यु बढ़ रही है
मत्स्य उद्योग को नुकसान पहुंच रहा है
इसका प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा दोनों पर पड़ सकता है।
सरकार क्या कर रही है?
केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाने के लिए कई पहल शुरू की हैं।
NICRA कार्यक्रम
Indian Council of Agricultural Research के अंतर्गत चल रहे NICRA (National Innovations on Climate Resilient Agriculture) कार्यक्रम का विस्तार किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य:
जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देना
किसानों को नई तकनीक उपलब्ध कराना
जोखिम कम करना
अन्य प्रमुख कदम
सरकार द्वारा
माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा
सूखा-सहिष्णु फसल किस्मों का विकास
AI आधारित मौसम सलाह
स्मार्ट कृषि तकनीकों का विस्तार
जल संरक्षण कार्यक्रमों का विस्तार
जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
जलवायु संकट अब आर्थिक संकट बनता जा रहा है
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए जलवायु परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं रहा। बढ़ती गर्मी, घटती वर्षा, एल नीनो का खतरा, जल संकट और कृषि उत्पादन में गिरावट देश की अर्थव्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और करोड़ों किसानों की आय को प्रभावित कर सकती है।
यदि समय रहते जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर बड़े स्तर पर निवेश नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में भारत को खाद्य महंगाई, रोजगार संकट और ग्रामीण आर्थिक दबाव जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

