नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल के SIR (Special Intensive Revision) और वोटर लिस्ट से जुड़े मामलों की बढ़ती संख्या पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। Supreme Court of India के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने कहा कि अगर इसी तरह याचिकाएं आती रहीं तो इन मामलों के लिए अलग से विशेष बेंच बनानी पड़ेगी।
TMC ने उठाए नए आरोप
सुनवाई के दौरान Trinamool Congress (TMC) ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने बड़े पैमाने पर नए वोटर्स को शामिल किया है। TMC सांसद और वरिष्ठ वकील Menaka Guruswamy ने अदालत को बताया कि Form 6 के जरिए 5 से 6 लाख नए वोटर्स जोड़े गए हैं। Form 6 वह आवेदन होता है, जिसके जरिए 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नागरिक वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बेंच, जिसमें जस्टिस Joymalya Bagchi भी शामिल थे, ने कहा कि बिना दस्तावेज के मौखिक अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। अगर कोई शिकायत है, तो विधिवत याचिका दाखिल करनी होगी।कोर्ट ने साफ कहा, “हम बिना दस्तावेज के केवल मौखिक दलीलों पर सुनवाई नहीं कर सकते।”
SIR और वोटर लिस्ट विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल में SIR के तहत वोटर लिस्ट की समीक्षा की जा रही है। TMC का आरोप है कि बड़ी संख्या में वोटर्स के नाम हटाए गए। “Logical Discrepancy” जैसे आधार पर डिलीशन किया गया, जो केवल बंगाल में देखा गया।
चुनाव आयोग का पक्ष
Election Commission of India (ECI) ने कहा है कि 18 साल के सभी पात्र नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल होने का अधिकार है। चुनाव नामांकन की अंतिम तारीख तक आवेदन किए जा सकते हैं। हालांकि, नए जोड़े गए सभी वोटर्स आगामी चुनाव में वोट डाल पाएंगे, यह जरूरी नहीं
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि चुनाव से पहले बड़ी संख्या में Form 6 आवेदन आना असामान्य नहीं है, क्योंकि उसी समय कई युवा 18 साल के होते हैं और वोटर लिस्ट में शामिल होते हैं।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि इस तरह के मामलों की संख्या बढ़ती रही, तो अलग से बेंच गठित की जा सकती है। अब देखना होगा कि TMC इस मामले में नई याचिका दाखिल करती है या नहीं और अदालत आगे क्या रुख अपनाती है।
West Bengal SIR विवाद चुनावी पारदर्शिता और वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता से जुड़ा अहम मुद्दा बनता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी से साफ है कि अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे बढ़ा जाएगा।
