नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को उस समय भारी हंगामा देखने को मिला, जब कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2020 के भारत–चीन सीमा विवाद का जिक्र करते हुए पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देने की कोशिश की। सरकार ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि लोकसभा के नियमों के तहत किसी अप्रकाशित पुस्तक या सामग्री का हवाला नहीं दिया जा सकता। उनका आरोप था कि राहुल गांधी सदन को गुमराह कर रहे हैं। वहीं संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि स्पीकर द्वारा दिए गए नियमों को चुनौती नहीं दी जा सकती।
राहुल गांधी का पलटवार
राहुल गांधी ने कहा कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अहम मुद्दे पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोका गया। उन्होंने सवाल किया कि “कौन सा नियम मुझे चीन जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बोलने से रोकता है?” उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके द्वारा उद्धृत स्रोत पूरी तरह प्रमाणिक हैं।
विपक्ष का समर्थन
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार पर चर्चा से डरने का आरोप लगाया और कहा कि चीन से जुड़े मुद्दे पर खुली बहस होनी चाहिए। समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने भी कहा कि चीन का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाना चाहिए।
सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया
भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी पर सदन की गरिमा भंग करने का आरोप लगाया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है वह प्रकाशित नहीं हुई है, तो उसे सदन के पटल पर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि किताब में दिए गए तथ्यों की प्रामाणिकता संदिग्ध है।
कार्यवाही स्थगित
लगातार शोर-शराबे और तीखी नोकझोंक के बीच लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर और फिर शाम तक के लिए स्थगित कर दी गई। अंततः स्पीकर ओम बिरला ने सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया।
यह पूरा विवाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान हुआ, जिससे बजट सत्र का पहला दिन पूरी तरह हंगामे की भेंट चढ़ गया।
