नई दिल्ली. केंद्र सरकार की कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ट्रैफिक जाम कम करने और लोगों की आवाजाही आसान बनाने के लिए दो बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पहली परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ने के लिए लगभग 46 किलोमीटर लंबा छह लेन का ग्रीनफील्ड एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा। इस परियोजना की लागत करीब 14,400 करोड़ रुपये होगी।
सरकार का कहना है कि इस कॉरिडोर के बनने से शहर में यात्रा का समय लगभग 60 मिनट से घटकर 20 मिनट रह जाएगा। इससे धार्मिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक स्थलों तक पहुंच भी पहले से अधिक आसान होगी।
वरुणा नदी किनारे भी बनेगा नया एलिवेटेड कॉरिडोर
कैबिनेट ने दूसरी परियोजना के तहत वरुणा नदी के किनारे लगभग 43 किलोमीटर लंबे 4 और 6 लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर को भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 11 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग-31 (NH-31) को काशी रेलवे स्टेशन से जोड़ेगा। इसके बनने से वाराणसी रिंग रोड, वाराणसी एयरपोर्ट, काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन तक पहुंच आसान होगी। सरकार का मानना है कि इससे शहर में ट्रैफिक का दबाव काफी कम होगा।
सेमीकॉन 2.0 योजना को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट ने सेमीकॉन 2.0 कार्यक्रम को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन और चिप निर्माण को बढ़ावा देना है।
सरकार का कहना है कि इस योजना के जरिए भारत चिप डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। इसमें डिजाइन, मशीनें, कच्चा माल, नए फैब प्लांट, पैकेजिंग और रिसर्च जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मोबाइल फोन निर्माण को मिलेगा बढ़ावा
कैबिनेट ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंजूरी दी है। इस योजना के लिए 62,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और इसे अगले पांच वर्षों तक लागू किया जाएगा।
इस योजना के तहत कंपनियों को मोबाइल फोन निर्माण पर 2.25 प्रतिशत से 5 प्रतिशत तक प्रोत्साहन राशि मिलेगी। यदि कंपनियां भारत में बने पुर्जों का अधिक उपयोग करेंगी तो उन्हें 1.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।
सरकार का अनुमान है कि इस योजना से पांच वर्षों में करीब 39 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन होगा और मोबाइल निर्यात बढ़कर 15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। साथ ही लगभग 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होंगे।
नई यूरिया निवेश नीति को मंजूरी
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य देश में गैस आधारित नए यूरिया संयंत्र स्थापित कर उर्वरक उत्पादन बढ़ाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
नई नीति में लागत निर्धारण को अधिक पारदर्शी बनाया गया है। सरकार का कहना है कि इससे प्रत्येक नए यूरिया संयंत्र पर करीब 250 करोड़ रुपये की बचत होगी।
रेलवे की दो बड़ी परियोजनाओं को भी हरी झंडी
कैबिनेट ने ओडिशा और झारखंड में रेलवे की दो मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। इनमें पारादीप-हरिदासपुर डबलिंग और राजखरसावां-डांगोपोसी चौथी रेल लाइन शामिल हैं।
करीब 145 किलोमीटर लंबी इन परियोजनाओं पर 3,907 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि इन्हें 2030-31 तक पूरा कर लिया जाए। इन परियोजनाओं से रेल यातायात तेज होगा और माल ढुलाई की क्षमता में भी बढ़ोतरी होगी।

