नई दिल्ली. केरल में अगले मुख्यमंत्री को लेकर चल रही कई दिनों की राजनीतिक अटकलों पर आखिरकार गुरुवार को विराम लग गया। कांग्रेस नेतृत्व ने वरिष्ठ नेता V. D. Satheesan को राज्य का अगला मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की चुनावी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में कई नाम चर्चा में थे, लेकिन आखिरकार पार्टी हाईकमान ने सतीशन के नाम पर सहमति बनाई।
यूडीएफ सहयोगियों और कार्यकर्ताओं का मिला मजबूत समर्थन
बताया जा रहा है कि कांग्रेस विधायकों के बीच K. C. Venugopal को अधिक समर्थन प्राप्त था। पर्यवेक्षकों के साथ हुई व्यक्तिगत बैठकों में कांग्रेस के 63 में से 47 विधायकों ने उनके पक्ष में राय दी थी। इसके बावजूद सतीशन को यूडीएफ के प्रमुख सहयोगी दल Indian Union Muslim League (IUML) समेत कई सहयोगी दलों का समर्थन मिला, जिसने समीकरण बदल दिए।
आईयूएमएल के 22 विधायक खुलकर सतीशन के समर्थन में थे। वहीं पार्टी कार्यकर्ताओं, सोशल मीडिया अभियानों और सार्वजनिक प्रदर्शनों में भी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने की मांग जोर पकड़ चुकी थी।
कांग्रेस हाईकमान ने लिया अंतिम फैसला
मुख्यमंत्री चयन को लेकर कांग्रेस विधायक दल ने पहले ही प्रस्ताव पारित कर हाईकमान को अंतिम निर्णय लेने का अधिकार दे दिया था। इसके बाद एआईसीसी पर्यवेक्षक Mukul Wasnik, Ajay Maken और केरल मामलों की प्रभारी महासचिव Deepa Dasmunsi ने तिरुवनंतपुरम में विधायकों से चर्चा की थी।
सतीशन के लिए बड़ा राजनीतिक मुकाम
61 वर्षीय V. D. Satheesan के लिए यह फैसला राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि यूडीएफ को स्पष्ट जनादेश नहीं मिला तो वह सक्रिय राजनीति छोड़ देंगे। अब यूडीएफ की जीत ने पार्टी में उनकी स्थिति को और मजबूत कर दिया है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
एर्नाकुलम जिले के नेट्टूर में जन्मे सतीशन ने छात्र राजनीति से अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया था। उन्होंने थेवरा के सेक्रेड हार्ट कॉलेज में छात्र आंदोलन से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। बाद में वह महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी यूनियन और एनएसयूआई में भी महत्वपूर्ण पदों पर रहे।
परावुर सीट से लगातार मजबूत किया जनाधार
सतीशन ने 1996 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था, हालांकि वह मामूली अंतर से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने परावुर क्षेत्र में लगातार जमीनी स्तर पर काम किया और धीरे-धीरे अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाई। बाद के चुनावों में उन्होंने लगातार जीत दर्ज कर खुद को कांग्रेस के मजबूत नेताओं में शामिल कर लिया।
यूडीएफ की वापसी के रणनीतिकार माने जाते हैं सतीशन
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि V. D. Satheesan ने यूडीएफ को फिर से मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। उपचुनावों में मिली जीत और 2024 लोकसभा चुनाव में केरल में यूडीएफ के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान “टीम यूडीएफ” नारे के जरिए कार्यकर्ताओं और सहयोगी दलों को एकजुट करने की कोशिश की। साथ ही धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए यूडीएफ को सांप्रदायिक राजनीति के विकल्प के रूप में पेश किया।
लंबे इंतजार के बाद मिला मौका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सतीशन पहले भी कई बार सत्ता परिवर्तन के दौरान मुख्यमंत्री या मंत्री पद की दौड़ में थे, लेकिन हर बार मौका हाथ से निकल गया। यहां तक कि Oommen Chandy सरकार के समय भी उन्हें मंत्री बनाए जाने की चर्चा हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
अब मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष, संगठनात्मक मेहनत और चुनावी रणनीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
