नई दिल्ली. देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में पानी की कमी ने आगामी चीनी सीजन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। लंबे समय से बारिश की कमी और सिंचाई के लिए घटती जल उपलब्धता का असर गन्ने में चीनी की मात्रा और उससे होने वाली रिकवरी पर पड़ सकता है। उद्योग से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, यदि गन्ने की गुणवत्ता और चीनी रिकवरी में गिरावट आती है तो देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत की जरूरत से कम रह सकता है। ऐसी स्थिति में भारत को लगातार दूसरे साल चीनी का आयात करना पड़ सकता है।
करीब एक दशक बाद पिछले सीजन में हुआ था आयात
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। करीब एक दशक तक देश में चीनी का उत्पादन घरेलू मांग की तुलना में पर्याप्त रहा, लेकिन 2025-26 सीजन में उत्पादन घटने के कारण भारत को चीनी का आयात करना पड़ा। इसके बाद घरेलू बाजार में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई थीं। अब नए सीजन से पहले जल संकट ने उत्पादन को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में जल भंडार पर दबाव
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य है, जबकि कर्नाटक तीसरे स्थान पर आता है। दोनों राज्यों में जल उपलब्धता को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कर्नाटक में राज्य सरकार ने जलाशयों के पानी को प्राथमिकता के आधार पर पेयजल जरूरतों के लिए सुरक्षित रखा है। वहीं महाराष्ट्र में भी जल संकट को देखते हुए इसी तरह के कदम पर विचार किया जा रहा है।
अक्टूबर से शुरू होगी गन्ने की पेराई
उद्योग अधिकारियों के अनुसार, अक्टूबर से शुरू होने वाली गन्ने की पेराई के दौरान गन्ने में चीनी की मात्रा महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने पर गन्ने की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे प्रति टन गन्ने से मिलने वाली चीनी यानी रिकवरी कम होने की आशंका है। इसका सीधा असर कुल चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है।
सरकार पहले ही उठा चुकी है कई कदम
घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार पहले ही कई कदम उठा चुकी है। इनमें चीनी के स्टॉक पर सीमा लगाना, आयात की अनुमति देना और चीनी मिलों को पेराई सीजन जल्दी शुरू करने की अनुमति देना शामिल है। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी को रोकना रहा है।
उत्पादन घटा तो फिर बढ़ सकती है आयात की जरूरत
यदि आने वाले सीजन में पानी की कमी के कारण गन्ने की गुणवत्ता और चीनी रिकवरी में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो देश का कुल चीनी उत्पादन दबाव में आ सकता है। उत्पादन में बड़ी गिरावट की स्थिति में घरेलू मांग पूरी करने के लिए भारत को एक बार फिर विदेशी बाजार से चीनी खरीदनी पड़ सकती है। हालांकि, अंतिम स्थिति गन्ने की उपलब्धता, बारिश, जलाशयों के स्तर और आगामी पेराई सीजन के दौरान उत्पादन पर निर्भर करेगी।

